शुक्रवार, 4 सितंबर 2015

उबो उबो


टीचर- थारी हाज़री घणी कम है। तू एग्जाम में नी बई सके....
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पिंटियो- कोइ वात नी।
ओपणे अतरो घमंड नी है। मु तो उबो उबो ही परीक्षा परी दऊ ।

?

गुरुवार, 3 सितंबर 2015

मंगता

मारवाड़ी व्यक्ति ने रेल में खाने का डिब्बा खोला और चूरमा खाने लगा पास में बैठे अंग्रेज ने पुछा - (what ) "वॉट" वॉट.
मारवाडी बोला बॉटवा वास्ते नही है खावा वास्ते लाया हूँ.......मंगता

गरूड़ पुराण

मारवाड़ के दो व्यक्ती रामा और शामा मुम्बई मे  50 वीं मंजिल पर खड़े बात कर रहे थे ।

रामा -  काँई रे शामा !

शामा-  काँई ?

रामा - काँई रे अटू निचे पड़ जावां तो काँई वंचे....

शामा - काँई नी वंचे

रामा - नी यार थोड़ो घणों कई तो वंचे

शामा -  अठे तो कई नी वंचे पर
घरे गरूड़ पुराण जरूर वंचे.

बुधवार, 2 सितंबर 2015

भादवै री बडी तीज

एक दिन पैली ही धमोळी ।
बडी तीज रो बरत करण आळी
लुगायां इण रात भेळी बैठ
मनभावणा पकवाना, मिठायां
अर फळ अरोगै ।
*
आज है भादवै री बडी तीज !
इण नै सातूडी़ तीज भी कैवै ।
आखै दिन निराहार रैय
लुगायां रात रा चांद रा दरसण
कर परी नीमडी़ आगै बैठ'र
तीज माता री कथा सुणै अर
पछै आकडै़ रै पत्तां माथै राख'र
गोडै रै नीचकर दई रो फिद्दर ,
सातू अर फळ अरोगै !

भारतीय सेना : राजपूत रेजिमेंट

भारतीय सेना : राजपूत रेजिमेंट
रिटायर्ड पाकिस्तानी मेजर जनरल मुकीश खान ने अपनी पुस्तक
‘Crisis off
Leadership’ में लिखा है कि, भारतीय सेना का एक
अभिन्न
अंग होते हुए भी, भारतीय सेना राजपूतो के शौर्य से
अंजान ही रही
क्योंकि…..’घर की मुर्गी दाल बराबर !’
भारतीय सेना को राजपूतो की वीरता से कभी सीधा
वास्ता नही
पड़ा था ! दुश्मनों को पड़ा था और उन्होंने इनकी
शौर्य गाथाएं
भी लिखी! स्वयं पाकिस्तानी सेना के रिटायर्ड
मेजर जनरल
मुकीश खान ने अपनी पुस्तक‘ Crisis of Leadership’
के
प्रष्ट २५० पर, वे राजपूतो के साथ हुई अपनी १९७१ की
मुठभेड़
पर लिखते हैं कि, “हमारी हार का मुख्य कारण था,
हमारा राजपूतो
से आमने सामने युद्ध करना! हम उनके आगे कुछ भी करने
में
असमर्थ थे! राजपूत बहुत बहादुर हैं और उनमें शहीद होने
का एक
विशेष जज्बा—एक महत्वाकांक्षा है! वे अत्यंत
बहादुरी से लड़ते
हैं और उनमें सामर्थ्य है कि अपने से कई गुना संख्या में
अधिक
सेना को भी वे परास्त कर सकते हैं!”
वे आगे लिखते हैं कि……..
‘३ दिसंबर १९७१ को हमने अपनी पूर्ण क्षमता और
दिलेरी के
साथ अपने इन्फैंट्री ब्रिगेड के साथ भारतीय सेना पर
हुसैनीवाला के समीप आक्रमण किया! हमारी इस
ब्रिगेड में
पाकिस्तान की लड़ाकू बलूच रेजिमेंट और जाट
रेजिमेंट भी थीं !
और कुछ ही क्षणों में हमने भारतीय सेना के पाँव
उखाड़ दिए
और उन्हें काफी पीछे हटने के लिए मजबूर कर दिया!
उनकी
महत्वपूर्ण सुरक्षा चौकियां अब हमारे कब्ज़े में थीं!
भारतीय
सेना बड़ी तेजी से पीछे हट रही थीं और
पाकिस्तानी सेना
अत्यंत उत्साह के साथ बड़ी तेजी से आगे बढ रही थी!
हमारी
सेना अब कौसरे - हिंद पोस्ट के समीप पहुँच चुकी थी!
भारतीय
सेना की एक छोटी टुकड़ी वहां उस पोस्ट की
सुरक्षा के लिए
तैनात थी और इस टुकड़ी के सैनिक राजपूत रेजिमेंट से
संबंधित थे!
एक छोटी सी गिनती वाली राजपूत रेजिमेंट ने लोहे
की दीवार बन
कर हमारा रास्ता अवरुद्ध कर दिया ! उन्होंने हम पर
भूखे शेरों
की तरह और बाज़ की तेजी से आक्रमण किया! ये
सभी सैनिक
राजपूत थे! यहाँ एक आमने-सामने की, आर-पार की,
सैनिक से
सैनिक की लड़ाई हुई! इस आर-पार की लड़ाई में भी
राजपूत सैनिक
इतनी बेमिसाल बहादुरी से लड़े कि हमारी सारी
महत्वाकांक्षाएं,
हमारी सभी आशाएं धूमिल हो उठीं, हमारी
उम्मीदों पर पानी
फिर गया ! हमारे सभी सपने चकना चूर हो गये!’
इस जंग में बलूच रेजिमेंट के लेफ्टिनेंट कर्नल गुलाब हुसैन
शहादत
को प्राप्त हुए थे! उनके साथ ही मेजर मोहम्मद जईफ
और
कप्तान आरिफ अलीम भी अल्लाह को प्यारे हुए थे!
उन अन्य
पाकिस्तानी सैनिकों की गिनती कर पाना
मुश्किल था जो इस
जंग में शहीद हुए ! हम आश्चर्यचकित थे मुट्ठीभर राजपूतो
के
साहस और उनकी इस बेमिसाल बहादुरी पर! जब हमने
इस तीन
मंजिला कंक्रीट की बनी पोस्ट पर कब्जा किया,
तो राजपूत इस
की छत पर चले गये, जम कर हमारा विरोध करते रहे —
हम से
लोहा लेते रहे! सारी रात वे हम पर फायरिंग करते रहे
और सारी
रात वे अपने उदघोष, अपने जयकारे' से आकाश
गुंजायमान करते
रहे! इन राजपूत सैनिकों ने अपना प्रतिरोध अगले दिन
तक जारी
रखा, जब तक कि पाकिस्तानी सेना के टैंकों ने इसे
चारों और से
नहीं घेर लिया और इस सुरक्षा पोस्ट को गोलों से न
उड़ा डाला!
वे सभी मुट्ठी भर राजपूत सैनिक इस जंग में हमारा
मुकाबला करते
हुए शहीद हो गये, परन्तु तभी अन्य राजपूत सैनिकों ने
तोपखाने की
मदद से हमारे टैंकों को नष्ट कर दिया! बड़ी बहादुरी
से लड़ते
हुए, इन राजपूत सैनिकों ने मोर्चे में अपनी बढ़त कायम
रखी और
इस तरह हमारी सेना को हार का मुंह देखना पड़ा!
‘…..अफ़सोस ! इन मुट्ठी भर राजपूत सैनिकों ने हमारे इस
महान
विजय अभियान को हार में बदल डाला, हमारे
विश्वास और
हौंसले को चकनाचूर करके रख डाला! ऐसा ही हमारे
साथ ढाका
(बंगला-देश) में भी हुआ था! जस्सूर की लड़ाई में
राजपूतो ने
पाकिस्तानी सेना से इतनी बहादुरी से प्रतिरोध
किया कि हमारी
रीढ़ तोड़ कर रख दी, हमारे पैर उखाड़ दिए ! यह
हमारी हार का
सबसे मुख्य और महत्वपूरण कारण था ! राजपूतो का
शहीदी के
प्रति प्यार, और सुरक्षा के लिए मौत का उपहास
तथा देश के
लिए सम्मान, उनकी विजय का एकमात्र कारण था।
जय राजपुताना
जय क्षात्र धर्म
गजेन्द् सिंह पातावत
ठिकाना बरजासर
9660134135

मिनख री खोज

जूनां जूगा री बात हैं किणीखास काम रै खातिर अेक मोटा मूरख मिनख री खोज करण रो काम स्याणा समजणा लोग शुरू किनो जद व्है काकड़ (जंगल) में जाय देख्यो तद अेक मिनख रूखड़ा रे माथे बैठो एक डाळो काटे हो पण इण काम ने वो उलटी रीत सूं कर रह्यो हो, वो डाळा माथे बैठ विणणे गोड कनां सूं काट रह्यो हो जद वै भला मिनख विणने देख्यो तद वै सोच्यो इण सूं मूरख मिनख मिलणो मुसकल हैं वै पूछियो रे भाया थूं इण डाळा रे कटतां ही नीचो पड़सी उलटो कियूं बैठो हैं वो कयो इण  विध सूं मैं सोरो बैठ ने डाळो काट सकूं कवाड़ियो जीब रै साथे साथे चाले ही हो वो धड़ींद करतो नीचो आयगो आ ब़ात अपा सगळा जाणां पण आज म्हने एड़ौ लखावै के अपां मांसू घणकरा मिनख री गत विण गैले (डफोळ) सूं न्यारी कोनी पैलपोत अपां सबसूं घणा पढिया लिखिया लोगां री ब़ात करां जिण ने लोग विग्यानी कैवे वै लोग आपरी मैनत अर लगन सूं इण धरती माथे इतरा हथियार अर एड़ा टणका हथियार बणाय मेलिया हैं जिण सूं इण पूरी धरती ने सांत वळा पूरी खतम करी जाय सके आ सोचण री ब़ात हैं आखिर इण सूं तो विनाश इज हो सके ए मानखा रे खावण पिवण  ओढण पैरण रे काम तो आवेला कोनी दूजी बा़त विण मिनखां री करां जका घणा पैसा टका वाळा हैं वै आपरै मोटा मोटा मैल माळिया बणाय लांबी लांबी कारो रा काफला राखे जणा दीठ ए, सी, कार अर कमरा राखे पण वै आ बा़त भूल जावै के जिका ए ़सी ़ कमरा अर कार ने ठण्डी राखे वो वातावरण ने कितरो नुकसाण करे,... तीजी बा़त विण मिनखां री करां जका आप रे ग्यान रे कारण घणा चावा अर ठावा बाजे अर आंरे दिखायोडा़ रस्ते साधारण मिनख चाले आज जिका त्याग री जगा भोग री आथूंणा देशों री मान्यता ने अपणा वण री जका होडाहोड़ चाले हैमिनख ने कठै पूगावैला इण री बानगी आप इन्दराणी मुखर्जी वाळा मामला में देख सको इण माथै घणी बा़त री जरूत कोनी,,, चोथी बा़त म्हारे जिसा डफोळ मिनखां री हैं जिका जाणता बूझता देखा देखी आपरो नुकसाण करे जका बडैरो रै बणायोडी़ रीेतो ने छोड़ आपरी जडो़ सूं कटण में इज बहादूरी समजै मायङ भाषा बोलतो ने लाज आवे, देसी पोसाकों ने तीज तैंवार पैरता शरमा मरै  मां बापू ने जीवता ने मरियोड़ा कैवे (मम्मी डैडी) होळी दिवाळी ने छोड़ वैलेन्टाइन डे मनावे राम नमी, जनम आटम ने छोड़ खुद रा अर टाबरां रा जनम दिन मनावे, ....बा़तां घणी हैं कदै इ फैरूं करसा   एक अरज हैं अै म्हाराी गैली बाता हैं चौखी नी लागै तो गैला री गैलाइ माफ कराजो.....

मंगलवार, 1 सितंबर 2015

फरला

फरला
फरला- मानसिक क्षमता द्वारा लिया गया एक साहसिक निर्णय अवकाश है ,जिसकी योजना पूर्व में ही बना ली जाती है और यह दूसरों के सहयोग से ही फलित होता है इसमें किसी प्रकार के संशय का कोई स्थान नही है  जब यह अंतिम चरण में होता है तो एक बंधू से  दुसरे बंधू के मस्तिष्क में स्थानांतरित होता रहता है  और यह क्रम तब तक चलता रहता है जब तक कि कोई अवरोध उत्पन्न नही हो जाता । यह आपसी विश्वास की मांग करता है पूर्ण जिम्मेदारी की कामना करता है।। फरला परिवार में शांति लाने वाला,बड़ो की देखभाल का अवसर प्रदान करने वाला होता है इससे पत्नी व् बच्चे भी प्रसन्न रहते है आजकल यह दूरस्थ क्षेत्रों में कार्यरत विद्वजनों के मध्य काफी लोकप्रिय है।।।।