Tuesday, 29 September 2015

बेटा दूध उजाळियो ,तू कट पड़ियो जुद्ध।

बेटा दूध उजाळियो ,तू कट पड़ियो जुद्ध।
नीर न आवै मो नयन ,पण थन आवै दूध।
(माँ कहती है बेटे तू मेरे दूध को मत लजाना ,युद्धमें पीठ मत दिखाना ,वीर की तरह मरना तेरे बलिदानपर मेरे आँखोंमें अश्रु नहीं पर हर्ष से मेरे स्तनों मेंदूध उमड़ेगा)

गिध्धणि और निःशंक भख ,जम्बुक राह म जाह।
पण धन रो किम पेखही ,नयन बिनठ्ठा नाह ।
( युद्ध में घायल पति के अंगों को गिद्ध खा रहे हैं,इस पर वीर पत्नी गिध्धणी से कहती है ,तू और सब अंग खाना पर मेरे पति के चक्षु छोड़ देना ताकि वो मुझे चिता पर चढ़ते देख सकें. )

इला न देणी आपणी ,हालरिया हुलराय।
पूत सिखावै पालनैं ,मरण बड़ाई माय।
(बेटे को झूला झुलाते हुए वीर माता कहती है पुत्र अपनी धरती जीते जी किसी को मत देना ,इस प्रकार वह बचपन की लोरी में ही वीरता पूर्वक मरने कामहत्त्व पुत्र को समझा देती है। )

एक डोकरी मर गी.

एक डोकरी मर गी.

वीका पाँच ही बेटा रो रया हा,

पेलो बेटो- बाई थु कां मरी, मने भी लारे लेन जाती.

दूसरो बेटो - बाई थु कां मरी,मने भी लारे लेन जाती.

युं का युं सारा बेटा बोल्या

पाछे बेठा एक बासा बोल्या
बेटा थारी बाई  बोलेरो  लेर थोड़ी गी जो था ने सबने लारे लेर जाती।

ऐ म्हारी मॉ म्हे कठेई कोनी जाऊ

कोलम्बस ने अमेरीका की खोज की

यदी उसकी लुगाई RAJASTHAN की होती तो कभी अमेरीका की खोज नही कर सकता क्यो ? 
.
क्यो की वो बहुत ज्यादा सवाल करती !
. सिद जाओ
.कीने साथे जाओ
.किण वास्ते जाओ
.कई खोजणे जाओ
.वापस कद आवोला
.कितो टाईम लागेला
.अटे कोनी खोजिजे कई
.नही खोज्या चाले कोनी
.हर बार थेईज क्यु जाओ
.मे अटे एकली कई करूला
थाने तो बस दोस्ता रे साथे मटरगस्ती करनी है
मै भी थारे साथे चालुला
.अन्त ने कोलम्बस जवाब देता

ऐ म्हारी मॉ म्हे कठेई कोनी जाऊ

तेजाजी की विरासत

तेजाजी की विरासत
(1) श्री वीर तेजाजी : शेषावतार लक्ष्मण जी
(2) जन्म तिथि : माघ शुक्ला चतुर्दशी, गुरुवार
वि.स. 1130
29 जनवरी 1074 ई.
(3) पिता : श्री ताहङदेव जी (थिरराज) धौलिया
(4) माता : श्रीमती रामकुंवरी
(5) वंश : नाग वंश की धौलिया जाट शाखा
(6) खांप : चौहान
(7) नख : खींची
(8) जन्म स्थल : खरनाल (नागौर)
(9) विवाह : पीले पोतङों में पुष्कर के नाग घाट पर
पुष्कर पूर्णिमा वि.स 1131
(10) पत्नी : पेमल
(11) ससुर : रायमल जी मुहता
(12) ससुर का गौत्र : झांझर जाट
(13) सासु : बोदल दे
(14) सासु का गौत्र : काला जाट
(15) ससुराल : शहर पनेर
(16) भाई : रुपजी, रणजी, गुणजी, महेश जी, नगजी
(17) भाभियाँ : रतनाई, शेरां, रीतां, राजा, माया
(18) बहिन : राजल
(19) बहनोई : नाथाजी सिहाग
(20) बहिन के ससुर : जोरा जी सिहाग
(21) बहिन का ससुराल : तबीजी (अजमेर)
(22) ननिहाल : त्योद व अठ्यासन
(23) नाना : दुल्हण जी सोढी
(24) गुरु : गुसांई जी व मंगलनाथ जी
(25) लाछां की संपत्ति : गौ माताएं
(26) वीरगति की निशानी : मेंमद मौलिया
(27) मेंमद मौलिया वाहक : आँसू देवासी
(28) तेजाजी के दुश्मन : सासु बोदल दे व काला गौत्री बालू नाग
(29) तेजाजी का खेत : खाबङ खेत (खरनाल)
(30) तेजाजी का तालाब : गैण तालाब (इनाणा व मूङावा के बीच)
(31) तेजाजी का रास्ता : तेजा पथ
(32) घाटा : लोकल घाटा (मालास परबतसर)
(33) नदी : पनेर की नदी
(34) तेजाजी का वचन : सत्यवाद
(35) तेजाजी की मर्यादा : नुगरां की धरती में वासा ना करां
(36) तेजाजी का व्रत : ब्रम्हचर्य
(37) सम्बोधन : सत्यवादी वीर तेजाजी
(38) माता का बोल : तेजा का बोयोङा मोती निपजे
(39) तेजाजी के साक्षी : चांद, सूरज व खेजङी वृक्ष
(40) बासग नाग द्वारा वरदान : काला बाला रोग चिकित्सा, घर घर पूजा
(41) तेजाजी देवता : सर्प विष चिकित्सा, कृषि उपकारक, पशुधन तारक
(42) पेमल का आशीर्वाद : पूजा से बस्ती नगर रोग निवारण
(43) तेजाजी की चिकित्सा पद्धति : गौमूत्र, नीमपत्र, काली मिर्च, देशी गाय का घी, देशी गाय के गोबर के कण्डो की भभूत
(44) तेजाजी का ध्वज : चांद, सूरज, नाग, खेजङी वृक्ष युक्त
(45) तेजाजी का भोग : देशी गाय का कच्चा दूध, नारियल, मिश्री
(46) तेजाजी के जागरण की रात व व्रत : भादवा सुदी नवमी हर वर्ष
(47) तेजाजी का शकुन : जागती जोत
(48) तेजाजी का गीत : गाज्यो गाज्यो जेठ आषाढ
(49) तेजाजी के गीत की प्रथम गायिका : लाछां गुर्जरी
(50) तेजाजी के गीत की पुन: रचना : बींजाराम जोशी
(51) तेजाजी का शिलोका : पूनमचन्द सिखवाल
(52) तेजाजी ख्याल : पं. अम्बालाल
(53) भक्ति : सालिगराम
(54) ईष्ट देव : शंकर भगवान
(55) सेवा : गौ माता
(56) कर्म : गौचारण, कृषि, युवराज पद दायित्व
(57) धर्म : गौरक्षा, न्याय, सत्यवाद
(58) तीर्थ : तीर्थराज पुष्कर
(59) वीरगति स्थल : सुरसुरा (अजमेर)
(60) दाह संस्कार स्थल : सुरसुरा (अजमेर)
(61) पेमल का सती स्थल : सुरसुरा (अजमेर)
(62) घोङी का नाम : लीलण
(63) प्रमुख शस्त्र : भाला
(64) सहअस्त्र शस्त्र : ढाल-तलवार, धनुष बाण
(65) रण संग्राम स्थल : मण्डावरिया पहाङी की तलहटी एवं चांग का लीला खुर न्हाल्सा करणाजी की डांग (पाली)
(66) प्रतिपक्षी : चांग के चीतावंशी मेर मीना
(67) मीना का सरदार : कालिया
(68) तेजाजी के साथी : पाँचू, खेता, जेता
(69) पेमल की सखी : लाछां गुर्जरी (चौहान खाँप)
(70) लाछां का गांव : रंगबाङी का वास पनेर (अजमेर)
(71) लाछां के पति : नन्दू गुर्जर
(72) लाछां की निशानी : लाछां बावङी

जनणी जणै तौ ऐङौ जणै,

"जनणी जणै तौ ऐङौ जणै,
कै दाता कै शूर ।
नींतर रहज्यै बाँझङी,
मती गमाज्यै नूर..॥"

"इला न दैणी आपणी,
हालरियै हुलराय ।
पूत सिखावै पालणै,
मरण बङाई मांय ॥"

धिन है.. वीर माता नै,
अर
निवण है..पूत सिखावण पिता नै,
इणरै साथै ई जसजोग कोख नै,
जिकी जगदीस जिस्यौ जबर जोधौ जायौ...!!

जळमभोम... जगदीस नै झुरै !
कीरत री वारता,
अर
जबर जस री ध्वजा...
जग मांय गूँजै...!
जांभाणी जोध जगचावै जगदीस री,
जय...जय...!!

भारतभौम रै शीश हिंवाळै माथै,
आज रै दिन जाँझरकै री बैळा,
जळमभौम री रुखाळी करताँ थकाँ कांम आया,
हिन्द री फौज रै मतवाळै मोट्यार सपूत जगदीस नै,
हियै री कोर तंणी...अंतस सूँ,
'सिरधाञ्जळि'...!

सांचाणी आज मुरधर रौ नागौर परगनौ
अर पाँचलै गाँव री माटी गरब करै,
जांभाणी न्यात अर गोदारा गोत रौ वीर बेटौ जगदीस,
वीरता री नुंवी गाथा रचनै अमर व्हैगो !
सीमाङै रै सपूत री,
सहादत नै सौ वळां....निंवण...!

जय हिन्द ............

Monday, 28 September 2015

सुन्दर सन्देश

बहुत सुन्दर सन्देश

एक चिड़िया ने मधुमक्खी से पूछा कि तुम इतनी मेहनत से शहद बनाती हो और इंसान आकर उसे चुरा ले जाता है, तुम्हे बुरा नही लगता ??

मधुमक्खी ने बहुत सुंदर जवाब दिया :

.तु थारो काम कर

Sunday, 27 September 2015

मारवाडी को फांसी

मारवाडी को फांसी की सजा सुनाई गयी ..

जज ने पूछा- कोई आखिरी ख्वाहिश?

मारवाडी - म्हारी जगह थे लटक जाओ

ऐ मोरुडा फागण मिने मिठो मिठो बोलियो रे।। "

जोधपुर गणेशोत्सव संपन्न हुआ और श्री गणेश जी कैलाश पर्वत पर पहुँचे।

माता पार्वती ने पूछा---" कैसा रहा उत्सव का माहौल ? "

गणेश जी---" ऐ मोरुडा फागण मिने मिठो मिठो बोलियो रे।।।। "

माता पार्वती---" अरे, ये क्या बोलते हो ? "

गणेश जी---" अरे अमलिडो अमलिडो अमलिडो मोलो सांता ने लागे वालो अरे नाग तिरस् वा वालो ओ बाबो मोलो अमलोडो ।।।।"

रिद्धी ---" अरे, ये क्या है ??? "

गणेश जी---" ले नाच.. ले नाच.. ले नाच मारी भीनदडि भंडारा रे डीजे माते नाच ....."

सिद्धि -- अरे किया हुआ स्वामी ?????

गणेश जी --- ओ ढकण खोल दे .. ऐ ढकण  खोल दे कलाली बोतल को दारू रे पियाला मेतो थारे गर को।।।

शंकर जी---" ......आजकल टाबरा ने  जोधपुर भेजनो  ज़माना ही नी रियो। "

ल्यो मजो मारवाड़ी चुटकुलों को

ल्यो मजो मारवाड़ी चुटकुलों को

धणी - आज सजधज के कठे जा री से ?
लुगाई - आत्महत्या करणे जा री सुं !
धणी - तो इत्तो मेकअप क्यूँ करयो है ?
लुगाई - काल
अख़बार म्हें म्हारो फोटू भी तो छपसी ;~)

मारवाड़ी की पत्नी :
म्हने लागे म्हारी छोरी को अफेयर चालु है ।
पति : वो क्यूँ ?
पत्नी : "पॉकेट मनी" कोनी माँगे आजकल ।
पति : हे भगवान,,
इं को मतलब लड़को मारवाड़ी कोनी !

एक मारवाड़ी को एक्सीडेंट हो ग्यो..
डाक्टर बोल्यो - टांकों लगाणो पड़ेगो
मारवाड़ी - कित्तो पीसो लागेगो ?
डाक्टर - 2000 रिपया लागसी..
मारवाड़ी- अरे भाया..
टाँकों लगाणों है,, एंब्रोईडरी कोणी करवाणी !

.......मारवाडी ......
छोरो - आई लव यू
छोरी - चूप रे गेलसप्पा ,,
एक लेपड मेलियो नी तो सीधो जोधपुर पुगेला..
छोरो - थोडो धीरे मार जे,, नागौर मे थोडो काम हैं ।

एक मारवाडी भगवान सु अरज करे..

हे मारा छतीस करोड देवी देवता
मारे ज्यादा कइ कोनी छावे
बस आप सब मने एक -एक रुपया री
मदद कर दो महारो जीवन सफल हो जाए ~

 

Friday, 25 September 2015

काले जठे बात रोकी

काले जठे बात रोकी, वठां सूं आगे चालां तो आ बात पकड़ में आवै के, इण जगत में दोय दीठ परा परी सूं चालै ।एक दीठ जका भारत री भोम में जलम लेयने आखै जगत में फैली । इण ने दार्शनिक दीठ कैय सको । इण दीठ सूं आ स्रीष्टी भगवान री माया हैं । अर  आ सगळी जीवा जूंण इसर रो रूप हैं । इण में सगळा अैक दूजा सांरू घणा मेहताउ अर घणा उपयोगी हैं । इण  दीठ   रो नतीजो ओ वियो के आपणे देस में केतान जुगां सूं प्रकृती री पूजा करां । अर प्रकृती ने देव मांनां अर इण री घणी रूखाळी कर इण ने पोखण रो काम करा । आ रीत आपणे अठे लगे टगै लारलै दस पनरा हजार बरसां  सूं चाल री हैं । आ बात इण सूं पुख्ता व्है जावै के आपां रूखां में देव री गिणती में राखां । जळ अर थळ में देव रो वासो मानां, सूरज अर चांद ने पूजा । बडेरा तो अन्न ने ही अन्न देव कैवता । अठे इण बात रो खुलासो करणो ठीक रैसी  के देव विणनै कैवै जको आप री सगळी चीज दैवतो रैवै । इण दीठ सूं आखी प्रकृती खुद रे खातिर  रती भर चीज कोनी राखै । आखी प्रकृती रो उपयोग मानखो इज करे ।अठे इण बात माथै घणौ ऊंडो ध्यान दिरावो  के प्रकृती रो उपयोग व्है, उपभोग नी व्है । इण आखरा माथै एकर ऊंडो बि़चार करां तो आ बात साफ हैं, के उपयोग में कोइ वस्तु जुडै़ । योग रो मतळब जुड़नै सूं हैं । पण उपभोग रो मतळब किणी चीज रो नाश व्हैण सूं, या खतम वेवण सूं लखावे । पण इण दिनां जगत में इण दीठ रो लोप व्है रह्यो हैं । अर दूजोडी़ दीठ जिणने विग्यानिक ( वैज्ञानिक ) दीठ कैवां विण रो बाधैपे घणो निजर आवै । इण दीठ सूं आ प्रकृती अणु परमाणुवां सूं आपो आप उपन्योडी़ हैं, इण रो जितरो उपभोग कर सको, वितरो करो । कितरो  उपभोग  करणो चाहिजै इण रो सोचण रो काम आपणो कोनी । अर उपयोग अर उपभोग रे लफडै़ में पड़ण री जरूरत कोनी । आ दीठ आथूणा देसां सूं आपणे अठे आयी  अर इण टैम घणी फळ फूल री हैं । विग्यानिक आखै जगत ने न्यारो न्यारो मान अर इण रो घणा सूं घणो उपभोग चावै । इण रो नतीजो ओ वियो  के मिनख री नीत पूरी तरै सूं बिगड़गी । अर वौ प्रकृती सूं खिळवाड़ करण लाग गो । विण रे भोग री कोइ माठ इ कोनी रही । मिनख दूजी सगळी जीवा जूंण अर प्रकृती रे पिरवार ने आप रे भोग री वस्तु बणाय ली । आज मानखे रे भोग भोगण री लालसा रो कोइ छै हैं न कोइ पार । आज रो मानखो इण में पूरी तरिया उळजियोडो निजर आवै । अैडी़ आंधी दौड़ शरु कर दिनी  वा कठै ठमैला किणी ठा कोनी । सगळा न्यारा न्यारा दौडे़ कठै इ भैळप निजर कोनी आवै । च्यारू मेर विग्यानिक खोज सूं अणमाप भोग री चीजो सूं बजार भरीया पड़िया हैं , पण नित नुवीं वस्तुओ आय री हैं । म्हारी मनसा आपने बजार में मेलण री कोनी, मैं फगत आप रो ध्यान इण बात माथै दिरावणी चावूं के आ दीठ ठीक हैं के गलत  । इण माथै ब़िचार करां । सबसूं पैली शरीर विग्यान री बात, हर अंग रा न्यारा न्यारा डाकटर इण सूं जद एक बिमारी रो इलाज करांवा तो दूजी माडाणी पनप जावै । इण री बानगी दैखावो   बी. पी. री दवा हिरदै माथै असर करसी, पीड़ रो दरद मिटावण वाळी दवा गुड़दा ने खराब करसी, इण भांत इण में घणी गबागब हैं । पण आंपां ने ठा लागै कोनी अर डाकटर साब बतावै कोनी । दूजी दीठ बजार माथै न्हाळो इण री बानगी दैखावो । एक फटफटियो (मोटर साइकल) बणावण कम्पनी ने आप रे बणायोडा़ सगळा फटफटियो ने बजार में बैचणा हैं । इण वास्ते इण ने ग्राहक घणा चाहिजै ला, जद वा एक पिरवार रे जणा दीठ फटफटियो बैचण कोसिस करसी , इण खातिर करजो दैसी, अर पूरै पिरवार ने तोड़ण री पक्की कोसिस करसी  । अबे फटफटियो ने दोड़ण खातर तैल री जरूरत व्हैसी , जद फेरूं करज री जरूरत, इण भांत घर ग्रस्थी री सगळी चीजो रे वास्ते करजो लेवणो पड़सी । आथूणा देसां  रो आज इण वास्ते दैवाळो निकळतो निजर आवै ।पण बजार वाद री आ भूख अबे होळै होळै आंपणे माय बड़ती दिसै । मांयता रे लायोडी चीजो टाबरां ने दाय कोनी आवै, मोटा टाबर छोरू ने आधी रात तांइ बारै फिरण री वकालत रे लारै बजार रो मोटो हाथ हैं । आज तीज तिंवार किकर मनाइजैला बजार तै करे, ब्रत, तीरथ सगळा बजार सूं तै वै । आज तो अैडो़ लखावे के बजार घर मांय बड़गो, के घर खुद बजार बणगो ।

" आज राग बिकै, रंग बिकै, आज मिनख रा अंग बिकै ।      आज किराया साठे कोख मिळै, अर आज मायड़ रो दूध बिकै ।। "

आज अणमाप भोग री वस्तुओ रे बिचाळै, अणधापण वाळी मनसा लियो मानखो कठै जासी इण बात माथै बि़चार करण री जरूरत हैं ।         
        भगवान सिंह, खारी

गरम मिर्ची बड़ा रेडी है कई ?

जोधपुर में आजकल प्रमुख चौराहों पर पुलिस द्वारा सी.सी.टी.वी. कैमरे लगवाये जा रहे है।,

लेकिन जोधपुर वाले लोग
तो जोधपुर  के ही है,

उन्होंने उससे एक नया प्रयोग किया"

एक जोधपुरी भाई ने
सुबह सुबह “पुलिस कंट्रोल” रूम में “फ़ोन” किया…!!

जोधपुरी भाई :- कई सा ... आप रा सी.सी TV  कैमरा काम कर रिया है कई ?

कंट्रोल रूम :- हाँ सा ।

भाई ने फिर पूछा :- जालोरी गेट दिखे है कई ?

कंट्रोल रूम:- हाँ सा। दिख तो रियो है।
जोधपुरी भाई-  तो सूर्या शाही नमकीन वाला री दूकान दिख री है कई ??

कंट्रोल रूम :- हाँ सा दिखे तो है। !
कई बात है ?

जोधपुरी भाई - अरे मालिक, थोड़ो
देख ने बतावो तो....
के " गरम मिर्ची बड़ा रेडी है कई ?

Thursday, 24 September 2015

घणी जूनी बात हैं

अैक घणी जूनी बात हैं ।जद टाबरां री भणाई पढाई गुरु जी रे आश्रम में विया करती, गुरूजी टाबरां ने आप रे अनुभव सूं अर आप रै तपोबळ सूं आवण वाळै जीवन रे वास्ते त्यार करता ।  जद मानखे रे जीवन रो धै मिनख पणा ने किकर निभाय सके अर जगत री सेवा कितरी बण सके अैडो़ हो ।इण भांत एक गांव रा च्यार टाबर गुरूजी रे आश्रम पूगा ।घणा बरसां तांइ तगड़ी मैनत अर करडी़ लगन सूं तीन मोट्यार तो जबरा त्यार व्हैगा, पण चौथोडो़ ठीका ठीक रह्यो ।जद वारी दीक्षा पूरी व्हैगाी, गुरूजी वां सगळा ने घरे जावण री इजाजत दींनी । ज्यां दिन आवण जावण सांरू पगां रो बळ इज काम आवतो ।च्यारू मोट्यार एक घणे जाडे जंगळ सूं  निकळ रह्या हा  के व्है अैक जगा हाडका बिखरियोडा़ देख्या, जद व्है बि़चार करियो के, अै हाडका किसा जिनावर रा व्है सकै ?       सगळा आप आप रो बि़चार राख्यो पण किणी नतीजा माथै नी पूग सक्या ।जद व्है विचार करियो के इण जगै गुरूजी रो ग्यान परखणो चाहिजै । जद आ बात खरी व्हैगाी, तद अैक जणौ बोल्यो  के म्हारें मंतरो रे जोर सूं  अां बिखरियोडा़ हाडकां रो म्है अैक टंटेर (कंकाळ) बणाय सकूं । अर व्हो आंखियां  मीच मंतर पडण लागो, थोडी़ क बखत बीती अर विणरै आंखियां खोलते पाण सगळा हाडका भैळा व्हैगा, अर एक नव हत्थे सींघ रो कंकाळ ब़णगो ।अैड़ै मोके दूजोडो गम किकर खाय सके, व्हो अणूतो उतावळो व्है बोल्यो के म्हारे मंतरा रो जोर थारे व्हाळा सूं घणो जबरो हैं । म्है इण टंटेर में मांस, लोही (खून) अर खालडी़ घाल सकूं । व्हो किणी रै पडू़तर री बाट कोनी जोयी, जट पलको जुकाय अर मंतरा रा जाप सरू करिया ।थोडी़ जैज में विण कंकाळ में अैडो़ सरूप कर दिनो जाणे केहरी भर नीद सूतो हैं ।अबे विण तिजोडे मोट्यार रे डील में तो जाणे लाय लागगी , व्हो जद तक आप रे मंतरो रो जोर नी दिखावै तद तांइ विणनै किकर चैन पड़ै ।व्हो अणूतो उतावळो व्है आप रो काम सरू करण वाळो इज हो जितरै सबसूं कम कूंत राखणियो चौथोडो़ बोल्यो, भाइ इण जीव घालणो जरूरी हैं  कांइ  ओ तो देखो ओ सींघ हैं, ओ जीवतो वियो तो विणाश करसी, ।पण विण री कुण सुणै, तिजोडो मोट्यार बोल्यो थूं जाणे तो कीं हैं कोनी, असल ठोठ ।जद इण में म्है जीव नी घालूं तो पछै म्है यां दोनां सूं कमतर कैवीजू, ।जद के म्हारै कनै इणां सूं सवाइ कळा हैं ।चौथोडो़ मोट्यार बोल्यो ठीक हैं भाइडा़ म्हने अठा सूं जाण दै, पछै थ्हांरे चोखो लागै ज्यूं करजो  इतरो कैवणो चावूं के थांरी आ कळा थांरो खळौ कर दैसी ।पण घणो ग्यानी किणरी सुणै । व्है तो ग्यान में गैला वियोडां व्है ।वो तिजोडो मोट्यार कोनी मान्यो अर आप रा सजीवण मंतरा सूं सींघ ने सरजीवत कर दिनो ।आगलो काम तो पछै सिंघ ने ही करणो हो ।अठै अैक बात रो खुलासो करणो चावूं के, आज रा विग्यानी जिण तरै प्रथ्वी तत्व ने निचोड इण मांय सूं अकूत उर्जा निकाळै विणी ज भांत आपणै बडेरो में वायु तत्व रो मंतरा सूं मथ ने अकूत उर्जा निकाळण रो बक हो ।पण मूळ बात इण में जका कैवणी चावूं वा आ हैं के विण च्यारू दोस्तों में पढियो लिखियो कुण हो...। इण माथै विचार करावाड़ो , ।दूजी बात हैं के इण में जको दीठ रो फरक निजर आवै विणनै आंपां दोय टुकडा़ में कर दैखां (१)पैली दीठ विण तीन जणा री है जिण रो सार हैं, कोइ काम वै सकै या कोनी वै सकै इण ने आप विग्यानिक दीठ कैय सको ।(२)दूजी दीठ चौथोडा़ मोट्यार री ही  के कोइ काम वैणो चाहिजै कै नी वैणो चाहिजै इण ने आप नीति री दीठ या दार्शनिक दीठ कैय सको  । मिनखा जूण में कुण सी दीठ कितरी मेहताउ हैं, इण माथै बि़चार करावाड़ो  ।बाकी री बात काले करांला   भगवान सिंह खारी

इंकी नानी न रोऊं,


अस्पताल में एक बच्चा पैदा होते ही नर्स से बोला :"भूख लगी है नाश्ते में क्या है?"

नर्स :"बाजरे की रोटी और सांगरी की सब्जी।"

बच्चा :"इंकी नानी न रोऊं, फेर राजस्थान मं आग्यो के !!!!?"

म्हारी गुणनखण्ड सी नार, कालजो मत बाल

~एक बार एक गणित के अध्यापक से उसकी
पत्नी ने गणित मे प्यार के दो शब्द कहने को कहा,

पति ने पूरी कविता लिख दी ~

म्हारी गुणनखण्ड सी नार, कालजो मत बाल
थन समझाऊँ बार हजार,
कालजो मत बाल

1. दशमलव सी आँख्या थारी,
न्यून कोण सा कान,
त्रिभुज जेडो नाक,
नाक री नथनी ने त्रिज्या जाण,
कालजो मत बाल

2. वक्र रेखा सी पलका थारी,
सरल भिन्न सा दाँत,
समषट्भुज सा मुंडा पे,
थारे मांख्या की बारात,
कालजो मत बाल

3.रेखाखण्ड सरीखी टांगा थारी,
बेलन जेडा हाथ,
मंझला कोष्ठक सा होंठा पर,
टप-टप पड रही लार,
कालजो मत बाल

4.आयत जेडी पूरी काया थारी,
जाणे ना हानि लाभ,
तू ल.स.प., मू म.स.प.,
चुप कर घन घनाभ,
कालजो मत बाल

5.थारा म्हारा गुणा स्युं.
यो फुटया म्हारा भाग ।
आरोही -अवरोही हो गयो,
मुंडे आ गिया झाग ।
कालजो मत बाल

म्हारी गुणनखण्ड सी नार कालजो मत बाल
थन समझाऊँ बार हजार कालजो मत बाल —

Wednesday, 23 September 2015

दारू दुसमण देह री, नेह घटादे नैण।

दारू दुसमण देह री, नेह घटादे नैण।
इज्जत जावै आप री, लाजां मरसी सैण।१।
दारू तो अल़घी भली, मत पीवो थे आज ।
कूंडो काया रो करै, घर मैं करै अकाज।२।
मद मत पीवो मानवी, मद सूं घटसी मान।
धन गंवास्यो गांठ रो, मिनखां मांही शान।३।
दारू री आ लत बुरी, कोडी करै बजार।
लाखीणै सै मिनख रा, टका कर दे च्यार।४।
दारू रा दरसण बुरा, माङी उणा री गत।
ज्यांरै मूँ दारू लगी, पङी जिणां नै लत।५।
ढ़ोला दारू छोङदे, नींतर मारू छोङ।
मद पीतां मरवण कठै, जासी काया छोङ।६।
मदछकिया छैला सुणो, देवो दारू छोङ।
नित भंजैला माजनू, जासी मूछ मरोङ।७।
दारू दाल़द दायनी, मत ना राखो सीर।
लाखीणी इज्जत मिटै, घर रो घटसी नीर।८।
दारू देवै दुःख घणा, घर रो देवै भेद।
धण रो हल़को हाथ ह्वै, रोक सकै ना बैद।९।
धण तो दुखियारी रहै, दुख पावै औलाद।
जिण रै घर दारू बसै, सुख सकै नहीं लाध।१०।
मिनख जूण दोरी मिलै, मत खो दारू पी'र।
धूल़ सटै क्यूं डांगरा, मती गमावै हीर।११।
दारू न्यूतै बण सजन, दोखी उणनै जाण।
दूर राखजे कर जतन, मत करजे सम्मान।१२।
दारू सुण दातार है, घणां कैवला लोग।
मत भुल़ ज्याई बावल़ा, मती लगाजे रोग।१३।
गाफल मत ना होयजे, मद पीके मतवाल।
लत लागी तो बावल़ा, राम नहीं रूखाल़।१४।
रैज्ये मद सूं आंतरो, सदां सदां सिरदार।
ओगणगारी मद बुरी, मत मानी मनवार।१५।
मद री मनवारां करै, नीं बो थारो सैण।
दूर भला इसङा सजन, मती मिलाज्यो नैण।१६।
जे सुख चावो जीव रो, दारू राखो दूर।
घर रा सै सोरा जिवै, आप जिवो भरपूर।१७।
गढ़'र कोट सै खायगी, दारू दिया डबोय।
अजै नहीं जे छोडस्यो, टाबर करमा रोय।१८।
दुख पावैली टाबरी, दे दे करमा हाथ।
परिवारां जे सुख चहै, छोङो दारू (रो) साथ।१९।
कवि ओ अरजी करै, मद नै जावो भूल।
मिनख जमारो भायला, कींकर करो फजूल।२०।

Sunday, 20 September 2015

पीथल और पाथल कन्हैयालाल सेठिया

पीथल और पाथल

कन्हैयालाल
सेठिया

अरे घास री रोटी ही, जद बन
बिलावडो ले भाग्यो |
नान्हों सो अमरयो चीख पड्यो,
राणा रो सोयो दुःख जाग्यो ||

हूं लड्यो घणो, हूं सह्यो घणो, मेवाडी
मान बचावण नै |
में पाछ नहीं राखी रण में, बैरया रो
खून बहावण नै ||

जब याद करूं हल्दीघाटी, नैणा में रगत
उतर आवै |
सुख दुख रो साथी चेतकडो, सूती सी
हूक जगा जावै ||

पण आज बिलखतो देखूं हूं, जद राजकंवर
नै रोटी नै |
तो क्षात्र धर्म नें भूलूं हूं, भूलूं
हिन्वाणी चोटौ नै ||

आ सोच हुई दो टूक तडक, राणा री
भीम बजर छाती |
आंख्यां में आंसू भर बोल्यो, हूं लिख्स्यूं
अकबर नै पाती ||

राणा रो कागद बांच हुयो, अकबर
रो सपणो सो सांचो |
पण नैण करया बिसवास नहीं,जद बांच
बांच नै फिर बांच्यो ||

बस दूत इसारो पा भाज्यो, पीथल ने
तुरत बुलावण नै |
किरणा रो पीथल आ पूग्यो, अकबर
रो भरम मिटावण नै ||

म्हे बांध लिये है पीथल ! सुण पिजंरा में
जंगली सेर पकड |
यो देख हाथ रो कागद है, तू देका
फिरसी कियां अकड ||

हूं आज पातस्या धरती रो, मेवाडी
पाग पगां में है |
अब बता मनै किण रजवट नै, रजुॡती खूण
रगां में है ||

जद पीथल कागद ले देखी, राणा री
सागी सैनांणी |
नीचै सूं धरती खिसक गयी, आंख्यों में
भर आयो पाणी ||

पण फेर कही तत्काल संभल, आ बात
सफा ही झूठी हैं |
राणा री पाग सदा उंची, राणा री
आन अटूटी है ||

ज्यो हुकुम होय तो लिख पूछूं, राणा नै
कागद रै खातर |
लै पूछ भला ही पीथल तू ! आ बात सही
बोल्यो अकबर ||

म्हें आज सूणी है नाहरियो, स्याला रै
सागै सोवैलो |
म्हें आज सूणी है सूरजडो, बादल री
आंटा खोवैलो ||

पीथल रा आखर पढ़ता ही, राणा री
आंख्या लाल हुई |
धिक्कार मनैं में कायर हूं, नाहर री एक
दकाल हुई ||

हूं भूखं मरुं हूं प्यास मरूं, मेवाड धरा
आजाद रहैं |
हूं घोर उजाडा में भटकूं, पण मन में मां
री याद रह्वै ||

पीथल के खिमता बादल री, जो रोकै
सूर उगाली नै |
सिहां री हाथल सह लैवे, वा कूंख
मिली कद स्याली नै ||

जद राणा रो संदेस गयो, पीथल री
छाती दूणी ही |
हिंदवाणो सूरज चमके हो, अकबर री
दुनिया सुनी ही ||