Monday, 31 August 2015

टुरियो ऊबो है

रास्ते पलट देते हैं हमारे देश के नौजवान,
जब कोई आकर यह कह दे कि
आगे टुरियो ऊबो है चालान काटे...

आज कल एक जबरी रीत चाली हैं

आज कल एक जबरी रीत चाली हैं मिनख ने मिनख नी गिणनो एक बानगी देखावो नेता मिनखां ने बोट मांने दुकान दार मिनखां ने गराक माने फैक्टरी मालक उपभोक्ता (खरच ने खावणियो) माने फिलम बणावणियो अर खेल तमासा वाळा मिनख ने दर्शक मांने जळसो करणीया मिनखां ने भीड़ मांने इतरीज बात वैती तो मिनख धिकाय लेवतो पण विणरो नाप तोल जद दूजी बांतां सूं होवण लागे मिनख जगत में बिचारो कांइ करै, दैखो 1,मोटो मिनख आज किण ने गिणा जिण रे रूपया पईसा घणा हैं कारों बंगळा हैं अर राज में पासो हैं आज मोटा गुरूजी कुण जिण री तिनखांवा मोटी लुगायां घणकरा बखांण वांरा रूप रंग ने लेयने सुणणने पढण में आवै जै लुगायां आपस में तारीफ करै तो गैणा अर कपड़ों री करै टाबरां री तारीफ वांरा पढाई में आवण वाळा नंबरां सूं व्है इण खातर म्हनै एड़ौ लखावै क जिन मिनखां खनै फक़त मिनख पणौ हैं वै कठैई चरचा में नी आय मिनख पणै ने रूखाळै अर रामजी देखै कै जै कठैई मिनख पणै री मांग व्है तो उठै मेलूं पण इण रा लैवाळ कम दिखै @मिनख जगत में मोकळा मिनखां तणा सुगाळ 1 पण जिण मिनखां में मिनखपणों वां मिनखां रो काळ 11

सांडसी

एक गाँव में 10, साल
का लड़का अपनी माँ के साथ
रहता था।

माँ ने सोचा कल मेरा बेटा मेले में
जाएगा,
उसके पास
10 रुपए तो हो,
ये सोचकर माँ ने खेतो में काम
करके शाम तक पैसे ले
आई।

बेटा स्कूल से आकर
बोला खाना खाकर
जल्दी सो जाता हूँ, कल मेले में
जाना है।

सुबह माँ से बोला -
मैं नहाने
जाता हूँ,नाश्ता तैयार
रखना,
माँ ने रोटी बनाई,
दूध
अभी चूल्हे पर था..!

माँ ने देखा बरतन पकडने के लिए
कुछ नहीं है,
उसने गर्म पतीला हाथ से
उठा लिया,
माँ का हाथ जल
गया।

बेटे ने गर्दन झुकाकर दूध
रोटी खाई और मेले में
चला गया।

शाम को घर आया,तो माँ ने
पूछा - मेले में क्या देखा,10
रुपए
का कुछ खाया कि नहीं..!!

बेटा बोला -
माँ आँखें बंद कर,तेरे लिए कुछ
लाया हूँ।

माँ ने आँखें बंद की,तो बेटे ने उसके
हाथ में गर्म बरतन
उठाने
के
लिए लाई सांडसी रख दी।

अब
माँ तेरे हाथ
नहीं जलेंगे।

माँ की आँखों से आँसू बहने लगे।

दोस्तों,
माँ के चरणों मे स्वर्ग है,
कभी उसे दुखी मत करो..!

सब कुछ मिल जाता है,
पर माँ दुबारा नहीं मिलती।

मेरी माँ
मां से प्यार करते हो तो आगे
शेयर जरुर करना.

सांडसी

एक गाँव में 10, साल
का लड़का अपनी माँ के साथ
रहता था।

माँ ने सोचा कल मेरा बेटा मेले में
जाएगा,
उसके पास
10 रुपए तो हो,
ये सोचकर माँ ने खेतो में काम
करके शाम तक पैसे ले
आई।

बेटा स्कूल से आकर
बोला खाना खाकर
जल्दी सो जाता हूँ, कल मेले में
जाना है।

सुबह माँ से बोला -
मैं नहाने
जाता हूँ,नाश्ता तैयार
रखना,
माँ ने रोटी बनाई,
दूध
अभी चूल्हे पर था..!

माँ ने देखा बरतन पकडने के लिए
कुछ नहीं है,
उसने गर्म पतीला हाथ से
उठा लिया,
माँ का हाथ जल
गया।

बेटे ने गर्दन झुकाकर दूध
रोटी खाई और मेले में
चला गया।

शाम को घर आया,तो माँ ने
पूछा - मेले में क्या देखा,10
रुपए
का कुछ खाया कि नहीं..!!

बेटा बोला -
माँ आँखें बंद कर,तेरे लिए कुछ
लाया हूँ।

माँ ने आँखें बंद की,तो बेटे ने उसके
हाथ में गर्म बरतन
उठाने
के
लिए लाई सांडसी रख दी।

अब
माँ तेरे हाथ
नहीं जलेंगे।

माँ की आँखों से आँसू बहने लगे।

दोस्तों,
माँ के चरणों मे स्वर्ग है,
कभी उसे दुखी मत करो..!

सब कुछ मिल जाता है,
पर माँ दुबारा नहीं मिलती।

मेरी माँ
मां से प्यार करते हो तो आगे
शेयर जरुर करना.

डिंगल भाषा विशुद्ध राजस्थानी गद्य

डिंगल भाषा विशुद्ध राजस्थानी गद्य उदाहरण
मणिहारी जा री सखी, अब न हवेली आव।
पीव मुवा घर आविया,  विधवा कवण बणाव।।
कुंडलिया छंद
धरा सदा नर वेधनी
चाळा नित चाहंत
भिड़े कटावै भाइयां
वळ पितु पूत विढंत
वळ पितु पूत विढंत
पियारी राज कज
कीधौ गोत कदन्न
अरजन चाप सज
आगे दांणव देव
किता ही आहुड़े
ले परव्रम अवतार
धरा कारण लड़े 
केवल चारण कवियों की भाषा
पिंगल ब्रज मिश्रित राजस्थानी ब्राह्मण, राव भाटों की भाषा
उदाहरण
जननी जने तो जन भदोरे जवार जिसा
नहीं तो बावरी तेरी कुख को बंधाय ले
एक रैन सुनी पीव आवन की
इक सुंदर नार सिंगार सजायो
पीळो ही केसर पीळो ही वेसर
पीळो ही हार हीये लिपटायो
पीव की खातिर पीळी भई
पर सांझ भयी पर पीव न आयो

आर.टी.ई. के अनुसार  राजस्थान में प्राथमिक  शिक्षा मातृभाषा राजस्थानी में दी जाए

प्रतिष्ठा में
शिक्षा मंत्री
राजस्थान सरकार
जयपुऱ
विषय :   आर.टी.ई. के अनुसार  राजस्थान में प्राथमिक  शिक्षा मातृभाषा राजस्थानी में दी जाए
महोदय ,
उपर्युक्त विषयान्तर्गत निवेदन है कि राजस्थान में  नि:शुल्क एवम अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार विधेयक-2009 लागू हो चुका है मगर  आज भी राजस्थान में इस अधिनियम के प्राण तत्व की अनदेखी हो रही है । इस विधेयक का ही नहीं अपितु राष्ट्रीय पाठ्यचर्या-2005 का प्राण तत्व है 6  से 14 वर्ष के बच्चों को उनकी मातृभाषा में प्राथमिक शिक्षा उपलब्ध करवाना । राजस्थान देश का एक मात्र ऐसा बडा़ राज्य है जिसके 6 से 14 वर्ष के बच्चे अपनी मातृभाषा में प्राथमिक शिक्षा प्राप्त करने से वंचित हैं । इसके पीछे तर्क दिया जाता है कि राजस्थान की मातृभाषा राजस्थानी  भारत के संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल नहीं है । यदि  राजस्थानी  भारत के संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल नहीं है  तो इस में बच्चों का क्या दोष है ? यह काम तो  देश की सरकार को करना था , राजस्थान के 6 से 14 वर्ष के बच्चों को नहीं । कितना  अज़ीब लगता  है कि देश के सब से बडे़ राज्य के करोडों लौग एवम उनके बच्चे अपनी मातृभाषा की मान्यता के लिए  1950 से तड़प रहे हैं । भारत की  जनगणना 2011में भी राजस्थान के 4 करोड़ 83 लाख लोगों ने अपनी मातृभाषा राजस्थानी दर्ज करवाई है। देश के अन्य राज्यों एवम विदेशों में भी राजस्थानी भाषियों की संख्या कम नहीं है। राजस्थान की विधान सभा ने भी 25 अगस्त 2003 को राजस्थानी भाषा को भारत के संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल  करने के लिए  एक सर्वसम्मत संकल्प प्रस्ताव पारित कर केन्द्र सरकार को भेजा हुआ भी है जो विगत 11 वर्षों से वहां लम्बित है । साफ़ है कि सरकार की कमी का ठीकरा बच्चों के सिर पर फ़ोडा़ जा रहा है ।नि:शुल्क एवम अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार विधेयक-2009 की धारा 29 की उपधारा 2 का [च ] बहुत साफ़-साफ़ कहता है कि-" शिक्षा का माध्यमजहां तक हो सके बचों की मातृभाषा के अनुरूप हो/ होगा !" इसी विधेयक की धारा 24  की उपधारा 1 का [ ख ] बहुत साफ़-साफ़ कहता है कि- "  धारा 29 की उपधारा 2 का [च ] के उपबंधों के अनुरूप पाठ्यक्रम संचालित करना और उसे पूरा करना । " राजस्थान के संदर्भ में इन धाराओं के प्रकाश में  सवाल  उठते जिनका समाधान राज्य सरकार को ही करना है । सवाल है कि- 1-क्या राज्य के बच्चों को उनकी मातृभाषा में शिक्षण प्राप्त करने का अधिकार प्राप्त है ।------ [अभी तक तो नहीं] । बचों को प्राथमिक शिक्षा उसकी मातृ भाषा में मिले इस हेतु उस भाषा का संविधान की  आठवीं अनुसूची में होना कत्तई जरूरी नहीं है-यह राज्य सरकार की मंशा  पर ही निर्भर करता है कि राज्य अपने बच्चों को किस भाषा में प्राथमिक शिक्षा देना चाहता है । संविधान भी  राज्य सरकार  इसकी छूट देता है और ऐसा कई राज्यों में हो भी रहा है । 2- पूर्वी राज्यों में एक से अधिक मातृभाषाओं में प्राथमिक शिक्षा दी जा रही है जो संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल नहीं है । ऐसा राजस्थान में भी किया जा सकता है यहां राजस्थानी भाषा के साथ-साथ उसकी बोलियां वागडी़, हाडौ़ती, मेवाती, ढुंढाडी़ , मारवाडी़, शेखावाटी, ब्रज  आदि में पाठ्यक्रम तैयार करवा कर शिक्षण करवाया जा सकता है । 3- क्या राज्य में नि:शुल्क एवम अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार विधेयक-2009   की धारा 29 की उपधारा 2 का [च]  व धारा 24  की उपधारा 1 का अक्षरस: पालन करने वाले शिक्षक नियुक्त किए जा रहे हैं ? ---[अभी तक तो नहीं ]  तो फ़िर राज्य में शिक्षक नियुक्ति हेतु जो टैट परीक्षा करवाई जा रही है उसका क्या औचित्य है ? यह टैट परीक्षा तुरन्त बन्द होनी चाहिए तथा राज्य के बच्चों के लिए सर्वथा उपयोगी शिक्षक नियुक्त होने चाहिए ।
कितनी बडी़ विडम्बना है कि राजस्थान का बच्चा अपनी मातृभाषा को छोड़ कर अन्य तमिल , तैलगु , मराठी,गुजराती ,बंगाली,मलयालम आदि 22 राजभाषाओं को अपनी शिक्षा का आधार बना सकता है ।
भारत के संविधान में अनुच्छेद 19 [1] भारत के नागरिकों को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार देता है । जब राजस्थान के नागरिकों की भाषा को ही मान्यता नहीं है तो वे अभिव्यक्त भला कैसे होंगे ? इसी तरह संविधान के अनुच्छेद 343 से 351 तक में भारतीय भाषाओं को संरक्षण देने की पैरवी की गई है । ये अनुच्छेद भारत की बडी़ से बडी़ व छोटी से छोटी यहां तक कि भाषायी अल्पसंख्यकों और छोटे-छोटे तबकों की कम से कम बोली जाने वाली भाषाओं  के संरक्षण की गारंटी देते हैं । भारत के संविधान में एक आठवीं अनुसूची भी है जिस में 14 सितम्बर 1949 से 15 अगस्त 1950 तक 14 भाषाएं शामिल की गई । बाद में राज्य सरकारों की मांग पर  अब तक 8 और भाषाएं शामिल की गई । वर्तमान में इस सूची में 22 भाषाएं शामिल हैं । बडा अफ़सोस है कि राजस्थान की जनता की लगातार मांग एव राजस्थान की विधान सभा द्वारा लिए गए सर्वसम्मत संकल्प प्रस्ताव तक की लगातार अनदेखी हो रही है । भारत की कोई राष्ट्र भाषा नहीं है मगर हिन्दी सहित 22 राज भाषाएं हैं । किसी भी प्रदेश में किसी भी भाषा को राज भाषा अथवा दूसरी राज भाषा बनाने का निर्णय भी राज्य की विधान सभा ही ले सकती है । संविधान का अनुच्छेद 345 किसी भी राज्य की  विधान सभा को यह अधिकार देता है कि वह अपने राज्य में बोली जाने वाली भाषाओं में से किसी एक को या अधिक भाषाओं को अथवा हिन्दी को एक से अधिक उद्देश्यों की पूर्ति हेतु उपयोग में ले सकती है । इसी क्रम में संविधान द्वारा प्रदत्त अधिकार का उपयोग करते हुए राजस्थान की विधान सभा प्रस्ताव पास कर  राजस्थानी भाषा को राजस्थान की द्वितीय राज भाषा घोषित कर सकती है । यह कदम उठाने के लिए राजस्थानी भाषा का संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल होना भी जरूरी  नहीं है  । करोडों बच्चों के अपनी मातृअभाषा में शिक्षा लेने के अधिकार की रक्षा हेतु राज्य सरकार को यह कदम उठाना ही चाहिए !
      भवदीय
डाँ.राजेन्द्र बारहठ
प्रदेश पाटवी,अखिल भारतीय राजस्थानी भाषा मान्यता संघर्ष समिति,राजस्थान

आजादी रे सागै ही राजस्थान री जनता रे साथे एक मोटो धोखो हुयो 

आजादी रे सागै ही राजस्थान री जनता रे साथे एक मोटो धोखो हुयो  वो ओ हे क विणरी मायड़ भाषा मूंडे सूं खोस लीनी जिण रो ओ असर वियो  क जिण प्रदेशों में आपरी मायङ  भाषा में पढ़णीया टाबर हा वै राजस्थान रा टाबरां सूं भारत सरकार री नोकरियों खास कर मोटी नोकरियों में घणा आया (बंगाली  तमिल  अर दूजी दिखणाद री भाषाओं इण में गिणीज सके) राजस्थान री नोकरियों अर जगत पोशाळाओं में घणकरा लोग उतराद रे प्रदेशों सूं आया जको जाण बूझ र राजस्थानी भाषा ने लारै राखण रा जतन करिया इण लोगों रो फायदो राजस्थानी भाषा ने लारै राखण में ही हो इण खातर व्है एड़ीज पक्की व्यवस्था बणाय दीनी  के अटारा टाबर कांइ पढेला वा ए तै करला  स्कूलो में किताबो कैड़ी व्हैला वा ए तै करेला इण कारण सूं आंपां लोग आंपणी जड़ा सूं कटता गया अर नवी पिढी रा टाबर आपरी मायङ भाषा री मटोट गवांय दीनी जूना संस्कारां सूं अळगा व्हैगा  इणीज कारण आज मायङ भाषा मान्यता री खातर इणो रे हिये में हिलौळ नी उठे  छाती में जोश रोधपळको नी उठे    स्कूलो में आपणे साथे किया ए लोग छळ करे इण री बानगी दैखो  पैली पोत पोशाळा मे आवणियो टाबर आपरै घरे एक मिनकी ने देख उण रो नाम आपरी मायङ भाषा में मां या दादी सूं सीख र पोशाळ में आवे अबे विने हिन्दी रा गुरूजी कैवे आ मिनकी  कोनी बिल्ली हैं  टाबर गतागम पड़ जावै पण इतरा सूं विणरौ छूटकारो कठै  अगरेजी रा सर आय ने केवे आ बिल्ली कोनी आ कैट हैं टाबर रे हिये में हाल ताइ चितराम पका व्हैणा हैं जिते तो घरवाळा री भाषा अर पोशाळ री भाषा टाबर ने डाफाचूक करदे  पण असली घात इण रे साथे आंपणी सरकार करे जद ओ टाबर एडा़ घणकरा शबद सीख जावै अबे परीक्शा री वेळा सगळा टाबरां सूं दस जिनावरों रा नाम पूछिजै जिण टाबर रे घरां अगरेजी बोलिजे वो ६ शबद सही बताय दै अर म्हारै वा ळौ टाबर ३ सही बतावै अबे म्हने अर म्हारै टाबर ने घर रा  समाज रा अर आंपणी सरकार ठोठ कैवे  गुरूजी ने नाजोगा कैवे पण इण ना जोगी व्यवस्था ने कोई नी कैवे में परीक्शा लीनी टाबर ने कितरा शबद याद विया जिण घर में अगरेजी बोले विण टाबर रे खजाने में ६ शबद विया अर म्हारै टाबर रै खजाने में ९ शबद विया कारण के वो एक री ठोड़ तीन तीन शबद याद करिया    मिनकी =बिल्ली =कैट     उन्दरो =चूहा=रैट3*3=9 इण भांत. राजस्थानी भाषा ने मान्यता नी दैय आपाने ना जोगा बणाया राखे   

Saturday, 29 August 2015

रक्षाबंधन पर महूरत धेखने की जरुरत नहीं

दोस्तों आप राखी वाले दिन किसी भी समय राखी बधवा सकते हैं , इसमें आप को कोई मुहूरत या राखी का कलर देखने की कोई जरुरत नहीं। राखी बाधना या बधवाना एक प्रथा है कोई पूजा नहीं जो इतनी चीजे ध्यान रखने की जरुरत है , त्यौहार को enjoy कीजिये और इस त्यौहार का जो मुख्य बिंदु है भाई-बहन का प्रेम , इसको मजबूत कीजिये। और दिन भर किसी भी समय राखी बंधवाई जा सकती है
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आजकल बहुत से लोग  लोग फेसबुक और टीवी पर आकर बताने लगे हैं  की ये समय भद्रा है , इसमें राखी न बाधे या मेष राशि वालो के लिए ये समय है और मेष राशि वाले लाल रंग की राखी बधवाए या ये करे वो न करे। तो दोस्तों राखी में बहन का प्रेम देखने की जरुरत है राखी का कलर , अपनी राशि या समय नहीं।
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ज्योतिष तो यही कहता हैं की राशि के आधार पे बिना कुंडली दिखाए कोई भी रत्न या कोई भी कलर या नंबर को लकी नहीं मानना चाहिए।
वैसे रावण के काल में रक्षा बंधन नही था। कोई सिद्ध करने वाला हो

भद्रा काल में रक्षा बंधन करने में कोई दोष होता हैं कृपया इस MESSAGE  से  लोगो में भ्रम न पैदा करे। हर पूर्णिमा को भद्रा पड़ेगी ही। और मुख्यतः रक्षा बंधन के दिन तो हर साल भद्रा होता है।
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एंड सबसे बड़ी बात ज्योतिष शास्त्र की की ............ भद्रा का दोष तभी माना जाता है ,जब भद्रा का निवास पृथ्वी लोक में हों ............ अर्थात् उस दिन विष्टि करण हो तो भद्रा होती है और उसी दिन विष्टि करण के साथ-साथ चन्द्रमा कर्क,सिंह,कुम्भ,मीन इन चार में से किसी एक राशि में हो।
अतः रक्षा बंधन के दिन by defult कभी भी ऐसा नही हो सकता। क्योंकि उस दिन हर साल श्रवण नक्षत्र ही पड़ेगा।जो,कि आपको पता ही होगा कि, मकर राशी में श्रवण नक्षत्र होता है। इसलिए हर साल रक्षाबंधन वाले दिन चन्द्र मकर में होगा। तो भद्रा का निवास पृथ्वी लोक में न होने से यह दिन भद्र के दोष से मुक्त है।

कुं कु चावल थाल सजायो

कुं कु चावल थाल सजायो, हाथां लीवी राखड़ी,
मेड़ी चढ़ चढ़ जोवे बीरा, बहना थारी बाटड़ी,
मन में मुलके मृगनयनी, जामण जाओ घर आवेला,
माँ बापू रा समाचार सुण, हियो म्हारो भर जावेला,
दौडूला झट रोटोड़ी, बीरा रे गले मिल जाऊंला,
नैणां में छलकेला आंसू, बीरा सूं पूछवाउला,
दीप जला मैं करू आरती, कुं कु तिलक लगाउला,
मुंडे में मंगलेश देयने, चावल तिलक चढ़ाउला,
हंसती रोती साँचा मन सु,बांधुला में राखड़ी,
मेड़ी चढ़ चढ़ जोवे बीरा, बहना थारी बाटड़ी।

हैपी राखी...

Friday, 28 August 2015

मायङ भाषा

मायङ भाषा मान्यता री, आज लिरावो आखङी ।
साचो नेग दे सवासणियों ने, राज बन्धाजों राखङी ।।

डायबिटीज अनिवार्य

मारवाड़ी ने मिठाई की दुकान खोली।

"नौकर की आवश्यकता है" का विज्ञापन दिया-

होशियार नौकर चाहिए।

योग्यता - डायबिटीज अनिवार्य।

Raksha bandhan का महत्व

रक्षा-बंधन २९ अगस्त २०१५ - १३:५० के बाद |
Raksha bandhan 29 August 2015 - After 13:50
इस पर्व पर धारण किया हुआ रक्षासूत्र सम्पूर्ण रोगों तथा अशुभ कार्यों का विनाशक है। इसे वर्ष में एक बार धारण करने से वर्ष भर मनुष्य रक्षित हो जाता है।
("सर्वरोगोंपशमनम् सर्वा शुभ विनाशनम् I सक्र्त्क्रते नाब्दमेकं येन रक्षा कृता भवेत् I I" - भविष्य पुराण )
इससे विजय, सुख, पुत्र, आरोग्य और धन प्राप्त होता है, यह रक्षाबंधन का विलक्षण प्रभाव हैं। यह रक्षाबंधन चारों वर्णों को करना चाहिये | जो व्यक्ति रक्षाबंधन करता है, वह वर्षभर सुखी रहकर पुत्र-पौत्र और धन से परिपूर्ण हो जाता है |
सावन के महीने में सूर्य की किरणें धरती पर कम पड़ती हैं. जिससे किसी को दस्त, किसी को उल्टियाँ, किसी को अजीर्ण, किसी को बुखार हो जाता है तो किसी का शरीर टूटने लगता है. इसलिए रक्षाबंधन के दिन रक्षासूत्र बाँध कर तन–मन–मति की स्वास्थ्य-रक्षा का संकल्प किया जाता है, कितना रहस्य है !
यह रक्षा सूत्र यदि वैदिक रीति से बनाई जाए तो शास्त्रों में उसका बड़ा महत्व है ।
Our scriptures have laid great significance on preparing this holy raksha thread in the vedic manner.
इसके लिए ५ वस्तुओं की आवश्यकता होती है -
There are five items needed -
(१) दूर्वा (घास) (२) अक्षत (चावल) (३) केसर (४) चन्दन (५) सरसों के दाने ।
1. Durva (Grass) 2. Akshat (Rice) 3. Kesar 4. Chandan 5. Mustard grains.
इन ५ वस्तुओं को रेशम के कपड़े में लेकर उसे बांध दें या सिलाई कर दें, फिर उसे कलावा में पिरो दें, इस प्रकार वैदिक राखी तैयार हो जाएगी ।
बहनें अपने भाई को, माता अपने बच्चों को, दादी अपने पोते को शुभ संकल्प करके बांधे ।
Sisters can tie them to their brothers, mothers to their children, grandmothers to their grandson after making holy resolutions.
महाभारत में यह रक्षा सूत्र माता कुंती ने अपने पोते अभिमन्यु को बाँधी थी । जब तक यह धागा अभिमन्यु के हाथ में था तब तक उसकी रक्षा हुई, धागा टूटने पर अभिमन्यु की मृत्यु हुई ।
In Mahabharata, Mother Kunti had tied this raksha-sutra to her grandson Abhimanyu. As long as the thread stayed put on his hand, he stayed protected. Abhimanyu was killed only after the thread snapped.
रक्षा सूत्र बांधते समय ये श्लोक बोलें -
"येन बद्धो बलि राजा, दानवेन्द्रो महाबलः । तेन त्वाम रक्ष बध्नामि, रक्षे माचल माचल: ।।"
इन पांच वस्तुओं का महत्त्व -
(१) दूर्वा - जिस प्रकार दूर्वा का एक अंकुर बो देने पर तेज़ी से फैलता है और हज़ारों की संख्या में उग जाता है, उसी प्रकार मेरे भाई का वंश और उसमे सदगुणों का विकास तेज़ी से हो । सदाचार, मन की पवित्रता तीव्रता से बदता जाए । दूर्वा गणेश जी को प्रिय है अर्थात हम जिसे राखी बाँध रहे हैं, उनके जीवन में विघ्नों का नाश हो जाए ।
(२) अक्षत - हमारी श्रद्धा कभी क्षत-विक्षत ना हो सदा अक्षत रहे ।
(३) केसर - केसर की प्रकृति तेज़ होती है अर्थात हम जिसे राखी बाँध रहे हैं, वह तेजस्वी हो । उनके जीवन में आध्यात्मिकता का तेज, भक्ति का तेज कभी कम ना हो ।
(४) चन्दन - चन्दन की प्रकृति तेज होती है और यह सुगंध देता है । उसी प्रकार उनके जीवन में शीतलता बनी रहे, कभी मानसिक तनाव ना हो । साथ ही उनके जीवन में परोपकार, सदाचार और संयम की सुगंध फैलती रहे ।
(५) सरसों के दाने - सरसों की प्रकृति तीक्ष्ण होती है अर्थात इससे यह संकेत मिलता है कि समाज के दुर्गुणों को, कंटकों को समाप्त करने में हम तीक्ष्ण बनें ।
Significance of these five items –
1. Durva - Just as on sowing even one seed of Durva, it spreads rapidly and grows out in numbers above thousands, in the same way, I pray that My brother's lineage and his good qualities keep growing steadily. Good character and mental purity should develop progressively. Durva is Shri Ganesha's favourite which implies that all obstacles get eradicated from the life of those who are tied with a rakhi.
2. Akshat - Our devotion must never give away, should always remain unbroken.
3. Kesar - The natural property of Kesar is heat i.e. may the one who is tied with a rakhi have a illustrious life. May the qualities of spirituality and devotion always flourish forth.
4. Chandan - The natural property of Chandan is cool and it emanates fragrance. Pray that he leads a composed life free of any mental tensions. Also, his life should be fragrant with selfless service to others, good character and self control.
5. Mustard seeds - The property of mustard is sharply acidic which conveys the meaning that we should be sharp in overcoming and eradicating the social ills around us.

खमा घणी सा. Happy . रक्षाबघंन. 

मारवाड री ईण पावन धरा माथै                                                                                                               विराजियोङा               
मोतिया सू महंगा                       
अरे म्हारे हिवङे रा हार         
रक्षाबघंन                  
रे इन पवित्र पर्व माथै         
हेत प्रीत                    
अर ओलखाण सारू      
म्हारे अन्तस हिवङे✌   
अर कालयिसु कोर सू थाने  ओर थ्योरे                          सगलै परिवार ने घणी मोकळी                          शुभ कामनाएं,                                                                ओर खमा घणी सा                               . Happy . रक्षाबघंन.        

Thursday, 27 August 2015

लेज्या रे बापकाणा !!!!

एक आदमी आप के सासरै गयो टाबराँ की माँ नै ल्याण नै !!

सासू बोली कै, कूँवरजी ऐक बार पाँच सात दिन घरां काम हैं जको थे पाँच सात दिना
बाद लेण नै आज्यायो !!

जवाईं:- मेरै के काम है तो !
थारो काम हूवै जणा भेज देया बितै दिन

मै अठै ही बैठ्यो हूँ !!

सासू बोली कै, थे ईता दिन अठै रहस्यो जणा लोग के कहसी ?

बूरा कोनी लागो ईता ईता दिन
सासरै मे बैठ्या ????

जवाईं :- सासूजी आ गैलाने छ: महीना
लगातार म्हारै घरे रह के आयी है जणा आ तो बूरी कोनी लागी ?

सासू बोली कै बेटा आ तो थानै परनायेङी है !

जवाईं:- तो मै के अठै रोपेङो हूँ ?

मै भी तो अठै परनायेङो ही हूँ !!!

सासु:- लेज्या रे बापकाणा !!!!

                         

कुण है भाई ?

एक बार एक Punjabi कुए में
गिर गया...
...और जोर जोर से रोने लगा !!
एक मारवाड़ी वहाँ से जा रहा था
उसने आवाज सुनी तो रुका
और बोला :
" कुण है भाई ?"
Punjabi : अस्सी हाँ !!
मारवाड़ी: " भाई !
एक-दो होता, तो काड देतो...
80 तो म्हारै बाप से कोणी निकळै!!!"
पड्या रेओ !

रोहणी ठिकाना के वीरों की गाथा

हिंदू धर्म ग्रंथ नहीँ कहते कि देवी को शराब चढ़ाई जाये.., ग्रंथ नहीँ कहते की शराब पीना ही क्षत्रिय धर्म है.. ये सिर्फ़ एक मुग़लों की साजिश थी हिंदुओं को कमजोर करने की ! जानिये एक अनकही ऐतिहासिक घटना...

"एक षड्यंत्र और शराब की घातकता...."

कैसे हिंदुओं की सुरक्षा प्राचीर को ध्वस्त किया मुग़लों ने ??

जानिये और फिर सुधार कीजिये !!

मुगल बादशाह का दिल्ली में दरबार लगा था और हिंदुस्तान के दूर दूर के राजा महाराजा दरबार में हाजिर थे , उसी दौरान मुगल बादशाह ने एक दम्भोक्ति की "है कोई हमसे बहादुर इस दुनिया में ?"
सभा में सन्नाटा सा पसर गया ,एक बार फिर वही दोहराया गया ! तीसरी बार फिर उसने ख़ुशी से चिल्ला कर कहा "है कोई हमसे बहादुर जो हिंदुस्तान पर सल्तनत कायम कर सके ??

सभा की खामोशी तोड़ती एक बुलन्द शेर सी दहाड़ गूंजी तो सबका ध्यान उस शख्स की और गया ! वो जोधपुर के महाराजा राव रिड़मल थे !

रिड़मल जी ने कहा, "मुग़लों में बहादुरी नहीँ कुटिलता है..., सबसे बहादुर तो राजपूत है दुनियाँ में,मुगलो ने राजपूतो को आपस में लड़वा कर हिंदुस्तान पर राज किया !
कभी सिसोदिया राणा वंश को कछावा जयपुर से तो कभी राठोड़ो को दूसरे राजपूतो से...।

बादशाह का मुँह देखने लायक था , ऐसा लगा जैसे किसी ने चोरी करते रंगे हाथो पकड़ लिया हो ।

"बाते मत करो राव...उदाहरण दो वीरता का ।"
रिड़मल ने कहा "क्या किसी कौम में देखा है किसी को सिर कटने के बाद भी लड़ते हुए ??"

बादशाह बोला ये तो सुनी हुई बात है देखा तो नही ,रिड़मल बोले " इतिहास उठाकर देख लो कितने वीरो की कहानिया है सिर कटने के बाद भी लड़ने की ... "

बादशाह हसा और दरबार में बेठे कवियों की और देखकर बोला "इतिहास लिखने वाले तो मंगते होते है में भी 100 मुगलो के नाम लिखवा दूँ इसमें क्या ? मुझे तो जिन्दा ऐसा राजपूत बताओ जो कहे की मेरा सिर काट दो में फिर भी लड़ूंगा ।"

राव रिड़मल निरुत्तर हो गए और गहरे सोच में डूब गए ।
रात को सोचते सोचते अचानक उनको रोहणी ठिकाने के जागीरदार का ख्याल आया ।

रात को 11 बजे रोहणी ठिकाना (जो की जेतारण कस्बे जोधपुर रियासत) में दो घुड़सवार बुजुर्ग जागीरदार के पोल पर पहुंचे और मिलने की इजाजत मांगी । ठाकुर साहब काफी वृद अवस्था में थे फिर भी उठ कर मेहमान की आवभक्त के लिए बाहर पोल पर आये ,, घुड़सवारों ने प्रणाम किया और वृद ठाकुर की आँखों में चमक सी उभरी और मुस्कराते हुए बोले " जोधपुर महाराज... आपको मैंने गोद में खिलाया है और अस्त्र शस्त्र की शिक्षा दी है.. इस तरह भेष बदलने पर भी में आपको आवाज से पहचान गया हूँ ।
हुकम आप अंदर पधारो...मैं आपकी रियासत का छोटा सा जागीरदार, आपने मुझे ही बुलवा लिया होता ।

राव रिड़मल ने उनको झुककर प्रणाम किया और बोले एक समस्या है , और बादशाह के दरबार की पूरी कहानी सुना दी, अब आप ही बताये की जीवित योद्धा का कैसे पता चले की ये लड़ाई में सिर कटने के बाद भी लड़ेगा ?

रोहणी जागीदार बोले ," बस इतनी सी बात..मेरे दोनों बच्चे सिर कटने के बाद भी लड़ेंगे और आप दोनों को ले जाओ दिल्ली दरबार में ये आपकी और रजपूती की लाज जरूर रखेंगे "

राव रिड़मल को घोर आश्चर्य हुआ कि एक पिता को कितना विश्वास है अपने बच्चो पर.. , मान गए राजपूती धर्म को ।

सुबह जल्दी दोनों बच्चे अपने अपने घोड़ो के साथ तैयार थे!
उसी समय ठाकुर साहब ने कहा ," महाराज थोडा रुकिए में एक बार इनकी माँ से भी कुछ चर्चा कर लूँ इस बारे में ।"
राव रिड़मल ने सोचा आखिर पिता का ह्रदय है कैसे मानेगा अपने दोनों जवान बच्चो के सिर कटवाने को , एक बार रिड़मल जी ने सोचा की मुझे दोनों बच्चो को यही छोड़कर चले जाना चाहिए ।

ठाकुर साहब ने ठकुरानी जी को कहा " आपके दोनों बच्चो को दिल्ली मुगल बादशाह के दरबार में भेज रहा हूँ सिर कटवाने को , दोनों में से कौनसा सिर कटने के बाद भी लड़ सकता है ? आप माँ हो आपको ज्यादा पता होगा !

ठकुरानी जी ने कहा बड़ा लड़का तो क़िले और क़िले के बाहर तक भी लड़ लेगा पर छोटा केवल परकोटे में ही लड़ सकता है क्योंकि पैदा होते ही इसको मेरा दूध नही मिला था।।

लड़ दोनों ही सकते है ,आप निश्चित् होकर भेज दो ।

दिल्ली के दरबार में आज कुछ विशेष भीड़ थी और हजारो लोग इस द्रश्य को देखने जमा थे ।
बड़े लड़के को मैदान में लाया गया और मुगल बादशाह ने जल्लादो को आदेश दिया की इसकी गर्दन उड़ा दो..

तभी बीकानेर महाराजा बोले "ये क्या तमाशा है ? राजपूती इतनी भी सस्ती नही हुई है , लड़ाई का मोका दो और फिर देखो कौन बहादुर है ?

बादशाह ने खुद के सबसे मजबूत और कुशल योद्धा बुलाये और कहा ये जो घुड़सवार मैदान में खड़ा है उसका सिर् काट दो...

20 घुड़सवारों को दल रोहणी ठाकुर के बड़े लड़के का सिर उतारने को लपका और देखते ही देखते उन 20 घुड़सवारों की लाशें मैदान में बिछ गयी ।
दूसरा दस्ता आगे बढ़ा और उसका भी वही हाल हुआ , मुगलो में घबराहट और झुरझरि फेल गयी ,इसी तरह बादशाह के 500 सबसे ख़ास योद्धाओ की लाशें मैदान में पड़ी थी और उस वीर राजपूत योद्धा के तलवार की खरोंच भी नही आई ।।
ये देख कर मुगल सेनापति ने कहा " 500 मुगल बीबियाँ विधवा कर दी आपकी इस परीक्षा ने अब और मत कीजिये हजुर , इस काफ़िर को गोली मरवाईए हजुर... तलवार से ये नही मरेगा...

कुटिलता और मक्कारी से भरे मुगलो ने उस वीर के सिर में गोलिया मार दी । सिर के परखचे उड़ चुके थे पर धड़ ने तलवार की मजबूती कम नही करी और मुगलो का कत्लेआम खतरनाक रूप से चलते रहा ।

बादशाह ने छोटे भाई को अपने पास निहथे बेठा रखा था ये सोच कर की यदि ये बड़ा यदि बहादुर निकला तो इस छोटे को कोई जागीर दे कर अपनी सेना में भर्ती कर लूंगा लेकिन जब छोटे ने ये अंन्याय देखा तो उसने झपटकर बादशाह की तलवार निकाल ली ।
उसी समय बादशाह के अंगरक्षकों ने उनकी गर्दन काट दी फिर भी धड़ तलवार चलाता गया और अंगरक्षकों समेत मुगलो का काल बन गए ।
बादशाह भाग कर कमरे में छुप गया और बाहर मैदान में बड़े भाई और अंदर परकोटे में छोटे भाई का पराक्रम देखते ही बनता था । हजारो की संख्या में मुगल हताहत हो चुके थे और आगे का कुछ पता नही था ।
बादशाह ने चिल्ला कर कहा अरे कोई रोको इनको..।
एक मौलवी आगे आया और बोला इन पर शराब छिड़क दो ।। राजपूत का इष्ट कमजोर करना हो तो शराब का उपयोग करो।
दोनों भाइयो पर शराब छिड़की गयी ऐसा करते ही दोनों के शरीर ठन्डे पड़ गए ।

मौलवी ने बादशाह को कहा " हजुर ये लड़ने वाला इनका शरीर नही बल्कि इनका इष्ट देवी है और ये राजपूत शराब से दूर रहते है और अपने धर्म और इष्ट को मजबूत रखते है ।
यदि मुगलो को हिन्दुस्तान पर शासन करना है तो इनका इष्ट और धर्म भृष्ट करो और इनमे दारु शराब की लत लगाओ ।। यदि मुगलो में ये कमियां हटा दे तो मुगल भी मजबूत बन जाएंगे ।

उसके बाद से ही राजपूतो में मुगलो ने शराब का प्रचलन चलाया और धीरे धीरे राजपूत शराब में डूबते गए और अपनी इष्ट देवी को नाराज करते गए ।
और मुगलो ने मुसलमानो को कसम खिलवाई की शराब पीने के बाद नमाज नही पढ़ी जा सकती । इसलिए इससे  दूर रहिये ।।

हिन्दू भाइयो ये सच्ची घटना है और हमे हिन्दू समाज को इस कुरीति से दूर करना होगा । तब ही हम पुनः खोया वैभव पा सकेंगे और हिन्दू धर्म की रक्षा कर सकेंगे ।