Wednesday, 23 December 2015

कर्म फुट्योडा

सुहागरात पे दूल्हा confuse हो रहा था की जाते ही पत्नी से किस बात को लेकर शुरुआत की जाये तो वो जब कमरे में पहुंचा तो 5 मिनट के लिए तो दुल्हन के पास चुपचाप बेठा रहा उसके बाद धीरे से बोला




थारो काई नाम हे?

दुल्हन शरमाते हुए बोली कर्म फुट्योडा कुंकु पत्री म कोनी पढ़्यो हो क

कनपटा मै भी दैणी  पड़े


हर बार अलफ़ाज़ ही काफी नही होते किसी को समझाने के लिए...
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घणी वार
कनपटा मै भी दैणी  पड़े

कलुवा

Mikesh ji ने क्लास से
पूछा- बच्चों न्यूटन का नियम
के बारे मेँ क्या जानते हो ?
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सब बच्चे चुप
.. ..
Mukesh ji- कलुवा तु बता बेटा
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कलुवा- पूरा नहीँ आता बस
आखिरी लाईन ही याद है
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मास्टरजी- चल आखिरी लाईन
ही सुना
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कलुवा - इसे ही न्यूटन का नियम कहते हैँ !
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वाह बेटा कलुवा जीते रहो !!

रजनीगंधा

अब तो हद हो गयी।
एक मित्र को कॉल किया तो
कॉलर ट्यून यह बजी  *जिस व्यक्ति से आप सम्पर्क
करना चाहते है  वे इस समय रजनीगंधा खा रहे है..
कृपया थूकने तक प्रतिक्षा करें" !
    P.S.

साग रोटी

पति सुबह नहाते गा रहा था

गोविंद बोलो हरी गोपाल बोलो

पत्नी - गोविंद बोलो  चाहे गोपाल बोलो

साग रोटी खानी वेतो पेला मटर छोलो

Thursday, 17 December 2015

तन्नै वहम था,

हरियाणा के एक स्कूल में :-

टीचर: मैं सुंदर थी, सुंदर हूं, सुंदर रहूंगी। इसी तरह तीनों काल का उदाहरण दो।

छात्र : तन्नै वहम था, तन्नै वहम है, तन्नै वहम रवैगा।

उधार रो पहावड़ो

"उधार रो पहावड़ो"
उधार एका -------उधार
उधार दुआ ------काले देउला
उधार तीया----- खाऊ  कोनी
उधार चौका ---खुल्ला कोनी
उधार पंजा --- पाछौ आऊ
उधार छक्का --माजनो मती पाड
उधार साता --माथो नी खा
उधार आठा -- खातो वताव
उधार नवा ---हिसाब खोटो
उधार दसा --वेइ जदी देऊ

Saturday, 12 December 2015

कृपा करकै आगे-नै मर ल्यो।

हरियाणा रोडवेज प्रशासन को शिकायत मिली कि हरियाणा रोडवेज के कंडक्टर बहुत बदतमीजी से बोलते
हैं !
उन्होने फौरन आदेश दिया कि सभी कंडक्टर कुछ भी कहने से पहले "कृपया" शब्द का इस्तेमाल करेंगे !
दूसरे दिन एक बस में कई आदमी चढ़ गए और दरवाजे पर लटक लिये। थोड़ी देर बाद कंडक्टर आया और
बोला ---- "कृपा करकै आगे-नै मर ल्यो।"

Friday, 11 December 2015

Marwari Chhora send whatsapp msg to his class teacher-

Marwari Chhora send
whatsapp msg to his class teacher-

सेवा रे माय
               श्रीमान साब,
               प्रधाना मारसाब
                 रा.उच.प्रा.वि.
       हरियाढाना जिलो(जोधपर)
विषय- घरे काम है-

महोदय,
              आज मारे घरे राबोडी, बडिया करी सा जीको मने ढानीया ढपानीया ऊ खाटी छा लानी पडी जीको आज तो स्कूल आवनो मुशकिल है सा तो आज री हाजरी भर दिजो नी मारसाब. काले पावेक भरी राबोडी बडिया आप रे ई लेने आइजाऊ!

               आप रो आघ्याकारी
                    नाम- गबरियो
          हाजरी लमबर-भाकरीया ने ठा हे पूछ लीजो

ठीक मारसाब अबे डागले जाऊ नी तो पछे रोबोडी बडिया चिडिया कमेडिया खाजाई....

Friday, 4 December 2015

हरियाणवी आदमी जवाब उल्टे नही देता...

हरियाणवी आदमी जवाब उल्टे नही देता... लोग सवाल उल्टे करते हैं। नहीं यकीन आता, तो पढ़िए मस्त जोक

जज: तू तीसरी बार अदालत आया है, तने शर्म कोनी आती?

आदमी: तू तो रोज़ आवे है, तने तो डूब के मर जाना चाहिए ।

ग्राहक: थारी भैंस की एक आंख तो खराब सै, फेर भी तू इसके 25 हज़ार रुपये मांगन लाग्र्या सै?

आदमी: तन्नै भैंस दूध खात्तर चाहिए या नैन-मटक्का करन खात्तर..?????

हज़्ज़ाम: ताऊ, बाल छोटे करने है के...?

ताऊ: बड़े कर सके है के !!

एक दिन पड़ोस का हरयाणवी छोरा आ के बोल्या-

" रे चाचा, अपनी इस्त्री देदे... "

चाचा ने अपनी जनानी की ओर  इसारा करया और बोला- " ले जा, वा बैठी.. "

छोरा चुप चाप देखन लाग्या...
बोला- " चाचा यो नहीं, कपडे वाली.."

चाचा बोल्या- " भले मानस, यो तन्ने बगेर कपड़े दिखे है के ??? "

छोरा गुस्से में चीखा- " रा चाचा
बावला ना बन, करंट वाली इस्त्री.."

चाचा- " बावले, हाथ ते लगा के देख...जे ना मारे करंट, फेर कहिये..."

Thursday, 3 December 2015

श्मशान की चाबी

Jai Haryana

30 दिन से बिना बताये घर से गायब एक हरियाणवी
पति घर लौटा
पत्नी - मैं थारे गम में बीमार पड़ी थी, जै मैं मर जाती तो
पति~तो मैं कोण सा श्मशान की चाबी अपणे साथ ले ग्या था

सबउ पेली

जोधपुर के आंटी जी कौन बनेगा करोड़ पति में 1 करोड़ जित गए।
अमिताभ का सवाल जितने के बाद।

आप जोधपुर जा कर 1 करोड़ रूपये का क्या करेंगी?
आंटी: सबउ पेली 100 रा खुला कराने 10 - 10 रुपिया छोरिया ने दुला।

सिग्नल

रोहतक में एक सिग्नल पर एक महिला की कार ग्रीन सिग्नल होने पर दुबारा स्टार्ट नहीं हुई।

लोग पीछे से होर्न बजाने लगे, सिग्नल ग्रीन से यलो और यलो से वापस रैड हो गया। लेकिन कार स्टार्ट नहीं हुई। लोग हार्न पर हार्न बजाने लगे।

तभी हरियाणा पुलिस का ट्रैफिक हवलदार रामफल वहाँ आया और उस महिला ड्राइवर से बड़ी ही विनम्रता पूर्वक बोला :-

"मैडम के बात होगी, कोई सा भी कलर पसंद ना आरा के....?"

Saturday, 21 November 2015

कविता- मैजर शैतान सिंह भाटी

मैजर शैतान सिंह भाटी ।।

फ़र्ज़ चुकायो थे समाज रो ,
मुरधर रा मोती, मारग लियो थे रीति रिवाज़ रो ।

बोली माता हरखाती, बेटो म्हारो जद जाणी,
लाखां लाशा रे ऊपर सोवेला जद हिन्दवानी।
बोटी बोटी कट जावै, उतरे नहि कुल रो पाणी।
अम्मर पीढयां सोढानी पिता री अमर कहानी ।
ध्यान कर लीजे इण बात रो, मुरधर रा मोती दूध लाजे ना पियो मात रो।

सूते पर वार न कीजो, धोखे सूँ मार न लीजो ।
साम्ही छाती भिड़ लीजो, गोला री परवा नाहीं।
बोली चाम्पावत राणी, पीढयां अम्मर धर कीजो।
फ़र्ज़ चुकायो भारत मात रो, मुरधर रा मोती,
सूरज सोने रो उग्यो सांतरो ।

राणी री बात सुणी जद, रगत उतरयो नैना में ।
लोही री नई तरंगा, लाली छाई अंग अंग में ।
माता ने याद करी जद, नाम अम्मर मरणा में।
आशीसा देवे जननी, सीस धरियो चरणा में।
ऊग्यो अगवानी जुध्ध बरात रो, मुरधर रा मोती,
आछो लायो रे रंग जात रो।

धम धम उतरी महलां सूँ, राणी निछरावल करती ।
बालू धोरां री धरती, मुळकी उमंगा भरती ।
आभो झुकियो गढ़ कांगरा, डैना ढींकी रण झरती।
पोयां पग धरता बारै, पगल्याँ बिलूम्बी धरती।
मान बधाज्यो बिन रात रो, मुरधर रा मोती, देसां हित मरियां जस जात रो ।

चुशूल पर चाय करण री, चीनी जद बात करेला ।
मर्दां ने मरणों एकर झूठो इतिहास पड़ेला।
प्राणा रो मोल घटे जद,भारत रो सीस झुकेला।
हूवेला बात मरण री, बंस रो अंस मरेला।
हेलो सुणज्यो थे गिरिराज रो, मुरधर रा मोती, देसां हित मरियां जस जात रो ।

तोपें टेंके जुधवाली,धधक उठी धूवाली।
गोळी पर बरसे गोळी,लोही सूँ खेले होली।
कांठल आयां ज्यूं काली, आभे छाई अंधियाली ।
बोल्यो बरणाटो गोलो, रुकगी सूरज उगियाली ।
फीको पडियो रे रंग प्रभात रो, मुरधर रा मोती, देसां हित मरियां जस जात रो ।

जमियो रहियो सीमा पर छाती पर गोला सहकर ,
चीनीडा काँपे थर थर, मरगा चीन्चाडा कर कर ।
सूतो हिन्दवानी सूरज, लाखां लाशा रे ऊपर ।
माता की लाज बचाकर, सीमा पर सीस चढ़ाकर ।

मुकुट राख्यो थे भारत मात रो, मुरधर रा मोती ,फ़र्ज़ चुकायो थे समाज रो।
मुरधर रा मोती, देसां हित मरियां जस जात रो ।
कानदानजी कल्पित , झोरङा

Actress pratishtha thakur

राजस्थान की संस्कृति को जीवंत रखना चाहती हूं  --प्रतिष्ठा ठाकुर
बेस्ट  एक्ट्रेस  अवार्ड  प्राप्त अभिनेत्री प्रतिष्ठा ठाकुर से खास मुलाकात
कुचामनसिटी / "आ तो सुरगा ने शरमावे ई पे देव रमण ने आवै इरो जस नर -नारी गावै धरती धोरा री .....  राजस्थान की संस्कृति सभ्यता,  कला, धरोहर ,इतिहास  ,  मीठा सुरीली  संगीत की खुशबू को राजस्थान  ही नही देश और पूरी दुनिया में महकना चाहती हूं और जीवंत रखना चाहती हूं यह कहना है राजस्थानी फिल्मों की सुपरहिट अभिनेत्री व  सर्व श्रेष्ठ  अभिनेत्री  अवार्ड  प्राप्त  प्रतिष्ठा ठाकुर  का । ठाकुर यहां   कुचामनसिटी  फोर्ट में  पहले राजस्थानी  भाषा के धारावाहिक  "कुमकुम रा पगलिया "  की शूटिंग मे भाग लेने आई है । ठाकुर इस धारावाहिक में  महारानी का किरदार निभा रही हैं  । प्रतिष्ठा ने  पत्रकारों से बातचीत में बताया कि  वह राजस्थान की संस्कृति को  जीवंत रखना चाहती है  और इसके लिए  वह प्रयासरत  है । पेशे से  भीलवाडा के सांगानेर में राजकीय सीनियर बालिका माध्यमिक विद्यालय में गणित विषय की सेकेंड ग्रेड शिक्षिका प्रतिष्ठा ठाकुर ने बताया कि वह पिछले  12 सालो से राजस्थान  की संस्कृति कला धरोहर के लिए काम कर रही है ।
ठाकुर  इससे पूर्व  धर्म बहन, रूपकंवर, परतू , कंगना तथा हिन्दी धारावाहिक  " यह रिश्ता  ना टूटे" सहित  कई  एलबमो मे अभिनय कर  चुकी है । इसके अलावा  कई हिट  स्टेज प्रोग्राम,  राजस्थान  सरकार  और पर्यटन  विभाग  की कई लघु फिल्म  (डाक्यूमेंट्री) का बतौर निर्देशन व एंकरिंग  कर चुकी है । उनकी आने वाली फिल्म कंगना, पगडी गजबण, रूपकंवर, ठकुराइन,  प्रमुख हैं । परतू  फिल्म  को यूएसए सरकार द्वारा  अवार्ड दिया गया है  ।

पोसावे कोन्नी


टीचर :(बच्चो से )सभी लड़कियो को अपनी बहन समझो .

तभी पपुड़ो:सर जी मै तो कोनि समझू .

टीचर : क्यो ?

पपुड़ो:सर अगर सभी को अपनी बहन समझूगा तो सर इतनी बहनो का मायरा कैसे भरूगा ???पोसावे कोन्नी ।

बाप रो नोम कुण काडियो। "...

शिक्षक मारवाड़ी लडके से-" टेबल पर स्याही किसने गिरायी।इसको राजस्थानी भाषा में अनुवाद करो।"

लङका- "ओ पाटिये माते आपरे बाप रो नोम कुण काडियो। "...

नुक्ति

गाँव के एक विद्यालय से....

अध्यापक- 15. अगस्त को हमे क्या मिली थी ?

छात्र - माड़साहब...."नुक्ति"

अणुता कुकेगा...।

एक स्कूल में टीचर ने कहा सब हिन्दी में बात करेंगे...

तभी भँवर बोला : मैडम पप्पूडा लारे से डुक्के चेप रहा हैं, पछै जद मैं मये-मये चुटिये भरूँगा तो अणुता कुकेगा...।

घी पॉजिटिव. .

एक सच्चा Jodhpuri जिम नहीं जाता।
सिर्फ जीमने जाता है
और
Jodhpuri का ब्लड ग्रुप होता है
घी पॉजिटिव.
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Saturday, 14 November 2015

मारवाडी रो दिल.....

मारवाडी रो दिल......नरम आईसकीम जेसो

मारवाडी री जबान....मीठी जलेबी जेसी

मारवाडी रो गुसो ....गरम फुलको जेसो

मारवाडी रो साथ.... चटपटो आचार जेसो

मारवाडी रो होसलो.. कडक खाखरा जेसो

मारवाडी रो स्वभाव.. मिलनशार दालढोकली जेसो

(केने को मतबल यो के मारवाडी के साथ रहो तो भुखा कोणी मरो)

Friday, 13 November 2015

दिवाली का राम राम सा.!!

भायां नै भोजायां नै
लोगां नै लुगायां नै,
बायां नै'र दायां नै,
दिवाली का राम राम, बड़े घरां जायां नै !
राज के जवांयां नै,
कौम के कसायां नै,
भूखा और धायाँ नै,
दिवाली का राम राम, फौज का सिफायां नै !
बार नै, त्यौहार नै,
जुवे जेड़ी हार नै ,
कार नै बेकार नै,
दिवाली का राम राम, जीत्योड़ी सरकार नै !
मनरेगा के दाणे नै,
शीला जी के गाणे नै,
गूंगे गेले स्याणे नै,
दिवाली का राम राम, कोतवाली थाणे नै !
भूली बिसरी डाक नै
मोबाइल री धाक नै
बायाँ री पोशाक नै
दिवाली का राम राम, रोज कटती नाक नै
मिलावट के माल नै ,
मंहगाई की चाल नै,
जनता के बेहाल नै ,
दिवाली का राम राम, ओज्युं आती साल नै !
दिवाली का राम राम सा.!!

Bhai dooj par..

भारत री भोम सगळा संसार सूं इधकी अर निराळी हैं ।इण माथै परमेसर खुद समै समै  माथै न्यारा न्यारा  रूप लैय प्रकटे । अर प्रकृती आप रो खजानो दोनू हाथा सूं अठै नित लूटाय री हैं ।  इण वास्ते अठै रा मिनखां में घणो हरख अर उमाव दिखै । इण वास्ते अठै घणा तीज  तैंवार  (त्यौहार) मनाइजे । आपणे तो कैवत हैं  के , सात वार अर तैरे तैंवार । इण रो कारण हैं अठै रा मिनख आद काळ सूं प्रकृती रा पूजारी अर पोखण वाळा रह्या हैं ।इण वास्ते  परमेसर अठै री प्रकृती में अलेखूं भांत भांत रा रंग भरीया हैं ।आखै जगत में आपणे अठै इज छै रूत व्है ।इण सबरो असर मिनख रे मन माथै भी पड़ै । इण भांत सगळा अवतार जद जद इण धरती माथै परगटिया ।व्हाने जैडो़ काम  करणो हो  व्है वैडी़ रूत रे मुजब ही कीनो । ओ इज कारण हैं के जद इण तीज तैवारां रा कारण खोजां तो धार्मिक रे सागै सागै प्रकृती रा कारण रो गैरो रंग निजर आवै । प्रकृती री दीठ सूं दैखां जद निजर आवै के  जद चैत रे महिने में बसंत री पतजड़ सूं उबर अर सगळी वनास्पति पाछी पोंगरण लागै ।नुंवां पतो  सूं सगळा रूख हरिया भरीया व्है ण  लागै ।जद आंप णो  नुंवो बरस लागै । नवां काम री जाजम जमावण री खातर सक्ती री घणी जरूरत व्है, इण वास्ते शरूआत  नौरतो सूं व्है ।सिरजण रो काम मायड़ रूप में व्है , इण वास्ते गवर री पूजा सूं बरस री थरपणा व्है ।  सूरज री किरणो में नित नित  जोर बधतो जावै इण सूं प्रकृती  फळै  फूलेला ।  इण री तैयारी में आखा तीज रो तैंवार मारवाड़ में विशेष रूप सूं मनाइजे । हळ, हाळी अर बीज , बळदो री  सार  संभाळ रो बगत व्है ।इण भांत अखै अमावस सूं लैय   ने आखा तीज तांइ  अै सगळा अबूज सावा  ब्यावो  री अर मुकलावो री घणी रंगत व्है । जद वैसाख रो महिनो पूरो व्है जावै  तो जैठ में आखी प्रकृती सूरज रे तीखे तावडे़ सूं तपै  जद मिनख भी इण तप में निरजला इग्यारस कर आप रो धरम निभावै ।   जद आषाड महिने काळी कळायण उमडे़ तद करसां रे हिये उमाव दिखै  जद सुनम रै सांवा री धूम मचै ।जद बादळ  बरसण लागै तद गुरु पूनम री गुरु पूजा कर साधू संत  चौमासै बिराजै  इण बगत घणो उच्छब व्है ।करसां री करम भोम माथै जद  धरती रो रो भरतार  इन्दर रे रूप में आय मैहा झड़ मांडै तद  सावण रे महिने  तीजणिया सिणगार सजै ।  धरती हरियो कंचुबौ धार  फळै  तद मायड़ शक्ती  आप रे कैइ रूपो में  प्रकटे  ।व्है  बैन रे रूप राखडी़ बांध भाइ रा उमर रा जतन करै  ।तो सांवण री तीज में सिणगार सज साजन ने रिजावै ।सावण अर भादवा रो महिनो मायड़ शक्ती रे नाम रैवै ।जद काजळी तीज ,ऊब छट  रा तैंवार  पति री उमर बधावण खातर करीजै । धरती जद धान सूं छक जावै अर विण में बीज पडण रो बगत आवै, जद सुरग वासी आतमावां ने तिरपत करण रो समै आवै । पछै नौरतो में सगती री पूजा करां  जद चैती नौरतो में ऊन्हाळू फसल पाकै, तो आसोज में सियाळू फसल पाक जावै ।मा अन्न पूरणा भण्डार भरण ने त्यार रैवै ।   जद वांने  नव दिन नौरतो में पूज, विणरी आशीश लैवे ।इण पछै सबसूं मोटो तैंवार आवै दीवाळी रो ।इण तैंवार ने मनावण रे लारै न्यारा न्यारा लोगां री न्यारी न्यारी  मान्यतावां । पण राम जी घरे आवण वाळी बात सगळा ही इण रो मूळ कारण मांने । पण जद प्रकृती री दीठ सूं दैखां तो तो काती में फसल पाकै, जद घर में उजास व्है । अर मन में उमाव व्है । अर मानखे री प्रकृती री दीठ सूं दैखां  तो जद भीतर में बैठो  काम, क्रोध रूपी रावण मरै जद  राम मिळै  अर राम मिळियां हि हिये में उजास व्है ।इण भांत ओ उजास रो तैंवार मनाइजे ।पौष रे महिने में  कड़कडा़वती ठण्ड पड़ै जद  अैडो़ लखावे जाणै प्रकृती खूंटी ताण  ने  सोय गी हैं , इण महिने ने मळ मास कैवे अर कोइ मोटो तैंवार कोनी आवै । पण जद माघ रै महिने में सूरज री किरणां में गरमास वापरै, अर प्रकृती आळस छोड़ पाछी आप री रंगत में आवण लागै, तद बसंत पाचम रो तैंवार आवै । अबे प्रकृती री झोळी फूलो सूं भरीज जावै अर इण रे फळण रो समै आवै जद मिनख रे मन में घणो हरख अर प्रीत रा बादळ घुमड़े, जद घणी उमंग, उछाह अर मस्ती रो तैंवार होळी आवै ।इण भांत बरस कद बीत जावै, पत्तौ  ही कोनी चालै । इण तैंवार रे लारै असली कारण तो चाल रह्यी  मान्यतावां ही हैं ।मैं तो यूंही अैक न्यारी दीठ सूं देखण री कोशीश करी । इण में मान्यतावां रो खंडन या मंडन कीं  कोनी हैं ।

Saturday, 7 November 2015

क्रांतीकारी केसरी सिंह जी बारहठ जयंती पर संस्मरण


21 नवं. क्रांतीकारी केसरी सिंह जी बारहठ जयंती पर संस्मरण
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आदरणीय ठा. साहब  के जीवन संघर्ष में पग पग पर साथ दिया उनकी सहधर्मिणी पुज्या माणक कँवर ने.
भारत माता स्वरूपा माणक बा ने ह्रदय को पत्थर से भी कठोर बना कर पुत्र वियोग ताउम्र सहन करके भी कर्तव्य पथ पर विचलित नहीं हुई.
बारहठजी नें काव्यमय पुण्य स्मरण में जो वर्णन किया इससे अधिक कोई अन्य क्या मूल्यांकन करेगा उस महान नारी का| भगवान एसी मां सबको दे.प्रताप जननी के रूप में बारहठ जी नें उनकी स्तुति की है.

" घाव दुःख सह लिये , कुछ धीर हुं अभिमान था |
किन्तु सच आधार में ' प्राणेश्वरी का प्राण था ||

इस ' मणि' बिन हो गयी , अंधारमयी सारी मही |
पतित पावन दीनबंधो, शरण इक तेरी गही ||

आज भी माणक भवन कोटा का वह चबुतरा जन जन का पुज्य स्थान है जहां हमारे सबके आदर्श दम्पती अस्थियों के स्वरूप में इस चबुतरे के गर्भ  में प्रतिष्ठापित है.  जहां उनकी स्मृति में अपनी मनोव्यथा ठा. साहब ने शब्दों मे व्यक्त की है -------------

विपदाघन सिर पर जुटे,
उठे सकल आधार
ग्राम धाम सब ही लुटे
बिछुटे प्रिये परिवार......

बरस चतुर्दश विपति के
ढाये गजब बलाय
कहा दशा मो दीन की
राम ही दिये रूलाय

राम सिया के साथ में
पुनि सनाथ गृह कीन
हन्त विपत्ति के अन्त में
मेरी ' मणि' रही न.

Thursday, 5 November 2015

500 रूपये का नोट


किराने की दुकान में बणिया 500 रूपये का नोट बहुत ध्यान से चेक कर रहा था।
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जाट : लाला जी, कितणै भी ध्यान तैं देख ले गाँधी की जगहा कटरीना ना दिखैगी।

सीजन

पत्नी : प्लीज मेरे जन्मदिन पर मुझे आप ब्लैकबेरी या एप्पल दिलवाइए। पति : काकडियो खा। सीजन इको ही चाल रयो है।

Sunday, 1 November 2015

पीली धरती पथवाली..

~पीली धरती पथवाली..
धन धोरां रो देस..
~अमर पागड़ी वीरां री.. केसर बरणो
वेश..
~जरणी जाया नाहर सम.. ऐड़ा वीर सपूत..
~"तेजस" धन या मरूधरा.. धन धन राजपूत..

Friday, 30 October 2015

हर कोई भरे बटका

हर कोई भरे बटका

घूमावा नहीं ले जावो,
तो घरवाळी भरे बटका |

घरवाळी रो ज्यादा ध्यान राखो,
तो माँ भरे बटका |

कई काम कमाई नी करो,
तो बाप भरे बटका |

पैईसा टक्का ना दो,
तो टाबर भरे बटका |

कई खरचो नी करो,
तो दोस्त भरे बटका |

थोड़ोक कई , केई दो,
तो पड़ौसी भरे बटका |

पंचायती में नी जावो,
तो समाज भरे बटका |

जनम मरण में नी जावो,
तो सगा संबंधी भरे बटका |

छोरा छोरी  पढ़े नहीं
तो मास्टर भरे बटका |

पूरी फीस नी दो ,
तो डाक्टर भरे बटका |

साधन रा कागज ना तो',
तो पुलिस भरे बटका |

मांगी रिश्वत ना दो,
तो साब भरे बटका |

चावता वोट ना दो,
तो नेता भरे बटका |

टेमसु उधार ना चुकाओ,
तो सेठ भरे बटका |

टाईमु टाईम किश्ता नी जमा करावो,
तो बैंक मैनेजर भरे बटका |

नौकरी बराबर नी करो,
तो बोस भरे बटका |

अबे आपई वताओ,
जार कठे जावा,

अठे हर कोई भरे बटका |
अठे हर कोई भरे बटका | |

Tuesday, 27 October 2015

म्हारी एैडी़  मान्यता हैं

लारला कैइ दिन, इण बात रो  बि़चार करण में निकळ गया के  समाज री, देस री, अर दुनिया री, सेवा करण सांरू निकळया मिनख आपस में क्यूं लडै़ ? इण रो कारण कांइ हैं के व्है सगळा एकण साथे रैय ने व्है आप रे समाज री, देस री अर दुनिया री सेवा नी कर सके ? इण रा मोकळा कारण व्है सके ।पण म्हने एडो लखावे के इण रो एक कारण सेवा रे नाम माथै, खुद रे अैंकार (अंहकार) ने तिरपत करणो हैं । आप इण दीठ सूं विचार करावो के  लगै टगै सगळा मिनखां ने खुद री न्यारी ओलखाण राखण री तगडी़ भूख व्है ।इण भूख ने तिरपत करण रे वास्ते लोग तरै तरै रा जतन करै ।कोइ घणा रूपिया कमावे, कोइ बिणज वोपार करे, कोइ राज रो मोटो अहलकार बणै इण भांत विण रे रूपिया री भूख तिरपत व्है ।पण अैंकार रा कैइ रूप व्है, अर घणा झीणा व्है पकड़ में आवै कोनी ।जद रूपिया घणा व्है जावै अर ओहदो ऊचों व्है जावै तद प्रतिष्ठा री भूख जाग जावै । प्रतिष्ठा री भूख पइसा (पैसा) री भूख सूं घणी तकडी़ व्है ।इण ने तिरपत करण खातिर मिनख घणी जुगत अर जनम करे ।कोइ सराय धरम शाळ बणाय आप रो नाम मोटा आखरां में लिखावे, तो कोइ किणी री अबखी वैळा में मदद करै ।कोइ आप रा संगठण बणाय लोगां री दिन रात सेवा करण सांरू निकळ जावै ।इण भांत जद लोगां रा काम निकळै जद लोग इणां ने भर भर मूंडा ने घणी आशीष दैवे ।अर इण लोगां ने खुद ने ही एडौ़ इज लखावे के सांचाणी व्है समाज री सेवा इज कर रह्या हैं इण भांत जद प्रतिष्ठा में जद बाधैपो घणो व्है जावै तद इणां री भूख में इण सूं सवायो बाधैपो व्है जावै  । अबै इणां ने आप री बात सबसूं सिरै लागै, अर खुद रो काम सगळा सूं ऊचों दिखै ।इण भांत मिनख में आप रे अनुयायां री भूख जागै विण ने अैडा़ मिनख घणा सुहावै जका आंखिया मीच ने बात माने, मोडा़ बैगा ऐडा़ मिनख मोकळा आंने मिळ जावै, जका इयांरा जै  जै कार करे ।इण भांत भीतर में भरियो अैंकार पतिजै अर आदमी खुद ने सेवा करण वाळो समझण लाग जावै । पण जद कोइ दूजो मिनख इणीज भांत रा काम करण लागै तद इण रा अैंहकार माथै चोट पडै, दूजा मिनख री तारीफ  सहन कोनी व्है  । काळजा  में लाय लाग जावै, हीये में धपळका  उठे  के  म्हारे जैडो़  दूजो कुण ।जद विण ने रोकण रा जतन करै ।इण में साथे रैवण वाळा चेला चांटी बळती लाय में पूळा नाखण रो काम करे ।इण में जद नवो पख हार मान आपरो रस्तो बदळ दैवे तद तो ठीक हैं ।पण जद दोनूं पख सेवा रे नाम माथै खुद रे मायला अैंहकार ने पोखण वाळा व्है जद भिड़न्त टळै कोनी ।अर देस रा, समाज रा, दळ रा अर संगठण रा दोय फाड़ व्है जावै ।इण सूं सबसूं मोटो नुकसान ओ व्है के  समाज रा चावा  ठावा अर नेम धरम सूं चालण वाळा, रीत री अर नीती री बात करण वाळा लारलै छैडै़ जावै परा अर कांनो करलै अर समाज में ओछी सोच रा अर लड़ण भिड़ण वाळा आगे आ जावै अर वां री चार आंनी चालण लागै । म्हारो मानणो हैं  के सेवा तो अैक  स्वभाव हैं जिण रो कारण हीये री पीड़ हैं ,विदको किणी री मदद कर सकूं, किणी रे काम आय सकूं,  आ सोच राखण वाळो ही सेवा कर सके, अर विण रो किणी रे साथे झगडो़ नी व्है सके  म्हारी एैडी़  मान्यता हैं ।   

Monday, 26 October 2015

हिंदी बोलेंगे,

एक बार गांव के स्कूल में नये
मास्टर ने कहा आज से सब
हिंदी बोलेंगे,,,
थोडी देर बाद में पिछे से
आवाज आयी
"सरजी "रामुडा लारे से डुका मार रहा हे"

राठोड़ राजपूतो - की उत्तपति

||जय माँ नागणेच्या री ||
आज हम आप सब को राठौड़ राजपूतो के वारे मे
परिचय करा रहे हैं, आशा हैं आपको पोस्ट पसन्द आयेगी

राठोड़ राजपूतो - की उत्तपति सूर्यवंशी राजा के
राठ (रीढ़) से उत्तपन बालक से हुई है इस लिए ये राठोड कहलाये,
राठोरो की वंशावली मे
उनकी राजधानी कर्नाट और कन्नोज बतलाई गयी है!
राठोड सेतराग जी के पुत्र राव सीहा जी थे!
मारवाड़ के राठोड़ उन ही के वंशज है! राव सीहा जी ने करीब
700 वर्ष पूर्व द्वारिका यात्रा के दोरान मारवाड़ मे आये और
राठोड वंश की नीव रखी! राव सीहा जी राठोरो के आदि
पुरुष थे !
अर्वाचीन राठोड शाखाएँ खेडेचा, महेचा , बाडमेरा , जोधा ,
मंडला , धांधल ,
बदावत , बणीरोत , चांदावत , दुदावत , मेड़तिया ,
चापावत , उदावत , कुम्पावत , जेतावत , करमसोत बड़ा ,
करमसोत छोटा , हल सुन्डिया , पत्तावत , भादावत , पोथल ,
सांडावत , बाढेल , कोटेचा , जैतमालोत , खोखर , वानर ,
वासेचा , सुडावत , गोगादे , पुनावत , सतावत , चाचकिया ,
परावत , चुंडावत , देवराज , रायपालोत , भारमलोत , बाला ,
कल्लावत , पोकरना . गायनेचा , शोभायत , करनोत ,पपलिया ,
कोटडिया , डोडिया , गहरवार , बुंदेला ,
रकेवार , बढ़वाल , हतुंधिया , कन्नोजिया , सींथल , ऊहड़ ,
धुहडिया , दनेश्वरा , बीकावत , भादावत ,बिदावत आदि……
राठोड वंश
Vansh – Suryavanshi
वेद – यजुर्वेद
शाखा – दानेसरा
गोत्र – कश्यप
गुरु – शुक्राचार्य
देवी – नाग्नेचिया
पर्वत – मरुपात
नगारा – विरद रंणबंका
हाथी – मुकना
घोड़ा – पिला (सावकर्ण/श्यामकर्ण)
घटा – तोप तम्बू
झंडा – गगनचुम्बी
साडी – नीम की
तलवार – रण कँगण
ईष्ट – शिव का
तोप – द्न्कालु
धनुष – वान्सरी
निकाश – शोणितपुर (दानापुर)
बास – कासी, कन्नोज, कांगडा राज्य, शोणितपुर,
त्रिपुरा, पाली, मंडोवर, जोधपुर, बीकानेर, किशनगढ़,
इडर, हिम्मतनगर, रतलाम, रुलाना, सीतामऊ, झाबुबा,
कुशलगढ़, बागली, जिला-मालासी,
अजमेरा आदि ठिकाना दानसेरा शाखा का है
दारु मीठी दाख री, सूरां मीठी शिकार।
सेजां मीठी कामिणी, तो रण मीठी तलवार।।
व्रजदेशा चन्दन वना, मेरुपहाडा मोड़ !
गरुड़ खंगा लंका गढा, राजकुल राठौड़ !!
दारु पीवो रण चढो, राता राखो नैण।
बैरी थारा जल मरे, सुख पावे ला सैण॥