Wednesday, 3 August 2016

रूडा़ राजस्थान बता वा थारी रूड़ी रीत कठे।

शीश बोरलो नासा मे नथड़ी सौगड़ सोनो सेर कठे ,
कठे पौमचो मरवण को बोहतर कळिया को घेर कठे,!
कठे पदमणी पूंगळ की ढोलो जैसलमैर कठै,
कठे चून्दड़ी जयपुर की साफौ सांगानेर कठे !
गिणता गिणता रेखा घिसगी पीव मिलन की रीस कठे,
ओठिड़ा सू ठगियौड़़ी बी पणिहारी की टीस कठे!
विरहण रातों तारा गिणती सावण आवण कौल कठे,
सपने में भी साजन दीसे सास बहू का बोल कठे!
छैल भवंरजी ढौला मारू कुरजा़ मूमल गीत कठे,
रूड़ा राजस्थान बता वा थारी रूड़ी रीत कठे!!

हरी चून्दड़ी तारा जड़िया मरूधर धर की छटा कठे,
धौरा धरती रूप सौवणौ काळी कळायण घटा कठे!
राखी पुनम रैशम धागे भाई बहन को हेत कठे,
मौठ बाज़रा सू लदीयौड़ा आसौजा का खैत कठे!
आधी रात तक होती हथाई माघ पौष का शीत कठे,
सुख दःख में सब साथ रेवता बा मिनखा की प्रीत कठे!
जन्मया पैला होती सगाई बा वचना की परतीत कठे,
गाँव गौरवे गाया बैठी दूध दही नौनीत कठे!
दादा को करजौ पोतों झैले बा मिनखा की नीत कठे,
रूड़ा राजस्थान बता वा थारी रूड़ी रीत कठे!!

जाज़म बैठ्या मूँछ मरौड़े अमला की मनवार कठे,
दोगज ने जो फिरतो रैतों भूखों गाजणहार कठे!
काळ पड़ीया कौठार खौलता दानी साहूकार कठे,
सड़का ऊपर लाडू गुड़ता गैण्डा की बै हुणकार कठे!
पतिया सागे सुरग जावती बै सतवन्ती नार कठे,
लखी बणजारो टांडौ ढाळै बाळद को वैपार कठे!
धरा धरम पर आँच आवता मर मिटनै की हौड़ कठे,
फैरा सू अधबिच में उठियौं बो पाबू राठौड़ कठे!
गळियौं में गिरधर ने गावैं बी मीरा का गीत कठे,
रूड़ा राजस्थान बता वा थारी रूड़ी रीत कठे!!

बितौड़ा वैभव याद दिलवै रणथम्बौर चितौड़ जठे,
राणा कुमभा को विजय स्तम्भ बलि राणा को मौड़ जठे!
हल्दिघाटी में घूमर घालै चैतक चढ्यों राण जठे,
छत्र छँवर छन्गीर झपटियौ बौ झालौ मकवाण कठे!
राणी पदमणी के सागै ही कर सौलह सिणगार जठे,
सजधज सतीया सुरग जावती मन्त्रा मरण त्यौहार कठे!
जयमल पता गौरा बादल रैखड़का की तान कठे,
बिन माथा धड़ लड़ता रैती बा रजपूती शान कठे!
तैज केसरिया पिया कसमा साका सुरगा प्रीत कठे,
रूड़ा राजस्थान बता वा थारी रूड़ी रीत कठे!!

निरमौही चित्तौड़ बतावै तीनों सागा साज कठे,
बौहतर बन्द किवाँड़ बतावै ढाई साका आज कठे!
चित्तौड़ दुर्ग को पेलौ पैहरी रावत बागौ बता कठे,
राजकँवर को बानौ पैरया पन्नाधाय को गीगो कठे!
बरछी भाला ढाल कटारी तोप तमाशा छैल कठे,
ऊंटा लै गढ़ में बड़ता चण्डा शक्ता का खैल कठे!
जैता गौपा सुजा चूण्डा चन्द्रसेन सा वीर कठे,
हड़बू पाबू रामदेव सा कळजुग में बै पीर कठे!
कठे गयौ बौ दुरगौ बाबौ श्याम धरम सू प्रीत कठे,
रूड़ा राजस्थान बता वा थारी रूड़ी रीत कठे!

हाथी को माथौं छाती झाले बै शक्तावत आज कठे,
दौ दौ मौतों मरबा वाळौ बल्लू चम्पावत आज कठे!
खिलजी ने सबक सिखावण वाळौ सोनगिरौं विरमदैव कठे,
हाथी का झटका करवा वाळौ कल्लो राई मलौत कठे!
अमर कठे हमीर कठे पृथ्वीराज चौहान कठे,
समदर खाण्डौ धोवण वाळौ बौ मर्दानौं मान कठे!
मौड़ बन्धियोड़ौ सुरजन जुन्झै जग जुन्झण जुन्झार कठे,
ऊदिया राणा सू हौड़ करणियौ बौ टौडर दातार कठे!
जयपुर शहर बसावण वाळा जयसिंह जी सी रणनीत कठे,
रूड़ा राजस्थान बता वा थारी रूड़ी रीत कठे !!
रूडा़ राजस्थान बता वा थारी रूड़ी रीत कठे।

Tuesday, 2 August 2016

गहणा गांठा गजब रा 

गहणां गांठा गजब रा  जीवां  बड़ो जतन्न
मिनखां सूं मोळा घणा मिनकी माथै मन्न

मरतो भूखो मानखो औदर मिले न अन्न
दुनियादारी दोगली मिनकी माथै मन्न

पुरसारथ रे पांण तो दोरो ढकणो तन्न
अनीति आमद करै जद मिनकी माथै मन्न

मिनकी मुख फेरे नहीं कितरा करो कळाप
अे सी बी ने ओळबा  परो मिटावो पाप

मिनखां से मिनकां बड़ा  भला सराया भाग
जुर जुर जीवै जूण ने  करमां बोले काग

मिनकी बड़ी महान .मेंबरशिप माडे थन्ने
नहीं टिकट नादान निर्दल थन्ने  जीतावस्यां ...

रतन सिंह चंपावत

Saturday, 30 July 2016

थाकी बैठी आज डोकरी।


थाकी बैठी आज डोकरी।
राखी घर री लाज डोकरी।।
वडकां बांधी,भुजबल पोखी।
काण कायदै पाज डोकरी।।
कदै नवेली दुलहण आंगण।
होती ही सिरताज डोकरी।।
कदै रूप भंमराता भंमरा।
पिव रो होती नाज डोकरी।।
सावण सुरंगी तीज लागती
भादरवै री गाज डोकरी।।
खाणो,पीणो,गाणो, रंजण।
इकडंकियो घर राज डोकरी।।
राजा राणी कितरी काणी।
हरजस वाणी साज डोकरी।।
साजै- मांदै आंणै- टांणै।
सबरै हाजर भाज डोकरी।।
समै देख फसवाड़ो फोर्यो।
खुद घर झेलै दाझ डोकरी।।
खुन पसीनो पायर पोस्या।
वां कीनी बेताज डोकरी।।
बहुवां देख सिकोतर आई।
बेटा बणिया बाज डोकरी।।
हाथ माथै नैं दे पिसतावै।
कर अपणो अक्काज डोकरी।।
सब रा ओगण देख विसारै।
क्षमा भर्योड़ी जाझ डोकरी।।
गिरधरदान रतनू दासोड़ी

Friday, 29 July 2016

घंटा

एक बार एक जाट ताऊ प्लेन से
लन्दन जा रहा था,
बगल में एक अंग्रेज बैठा हुआ था !
--
जाट ने अंग्रेज से पूछा - "आप क्या करते हो ?
अंग्रेज - मैं एक साईंटिस्ट हूँ... और आप ?
जाट - मैं मास्टर हूँ !
--
अंग्रेज - "WoW teacher क्या हम किसी टॉपिक पर बात कर सकते हैं ?"
जाट - "बिलकुल ,
--
अंग्रेज - "अच्छा, तुम मुझे न्यूक्लियर पावर के बारे में कुछ बताओ ?
--
जाट ये सुनकर चुप रह गया !
--
अंग्रेज - (व्यंग से) "ओह ~ तो तुम नहीं जानते ?"
जाट - "जानता तो हूँ लेकिन तु पहले मेरे एक सवाल का जवाब दो"
अंग्रेज - "hmmm~ पूछो .?
--
जाट - "मंदिर में भी घंटा होता है और चर्च में भी घंटा होता है, तो फिर
चर्च का घंटा मंदिर के घंटे से बड़ा क्यों होता है ?
अंग्रेज कुछ देर सोचता
रहा फिर बोला - "मैं नहीं जानता"
जाट ने एक दिया खीच के कान के निचे और बोला "अबे साले .. पता तनै घंटे का भी ना है और
बात न्यूक्लियर पावर की करै है !!

Monday, 4 July 2016

घंटा

एक बार एक जाट ताऊ प्लेन से
लन्दन जा रहा था,
बगल में एक अंग्रेज बैठा हुआ था !
--
जाट ने अंग्रेज से पूछा - "आप क्या करते हो ?
अंग्रेज - मैं एक साईंटिस्ट हूँ... और आप ?
जाट - मैं मास्टर हूँ !
--
अंग्रेज - "WoW teacher क्या हम किसी टॉपिक पर बात कर सकते हैं ?"
जाट - "बिलकुल ,
--
अंग्रेज - "अच्छा, तुम मुझे न्यूक्लियर पावर के बारे में कुछ बताओ ?
--
जाट ये सुनकर चुप रह गया !
--
अंग्रेज - (व्यंग से) "ओह ~ तो तुम नहीं जानते ?"
जाट - "जानता तो हूँ लेकिन तु पहले मेरे एक सवाल का जवाब दो"
अंग्रेज - "hmmm~ पूछो .?
--
जाट - "मंदिर में भी घंटा होता है और चर्च में भी घंटा होता है, तो फिर
चर्च का घंटा मंदिर के घंटे से बड़ा क्यों होता है ?
अंग्रेज कुछ देर सोचता
रहा फिर बोला - "मैं नहीं जानता"
जाट ने एक दिया खीच के कान के निचे और बोला "अबे साले .. पता तनै घंटे का भी ना है और
बात न्यूक्लियर पावर की करै है !!

Thursday, 30 June 2016

होपोरे कुन आवी

एक कड़वा सच

शादी में कुवारे
और शवयात्रा में बूढ़े
लोग ज्यादा इस वजह से जाते हे की दोनों को एक बात ही सताती हे

होपे नी जाइयो तो होपोरे कुन आवी

छगनजी

मारवाड़ में आधार कार्ड बन रहे थे तो एक लुगाई से अधिकारी ने पुछा की तुमारे घरवाले का नाम क्या है ........
..
.
लुगाई बोली हमारे उनका नाम नहीं लेते...
.....
अधिकारी::::::कोई हिंट तो दो:::::::::

लुगाई (3 गंजी + 3 गंजी)
......

अधिकारी बोला क्या ....
......??

तभी बाजु में बुड्ढा बोला
...........
साब "छगनजी"